हनुमानगढ़ जिले में तीन और मोबाइल टावरों से लाखों रुपए मूल्य के उपकरण चोरी
श्रीगंगानगर। हनुमानगढ़ जिले में मोबाइल टावरों के उपकरण चोरी होने का सिलसिला निरंतर जारी है। तीन और मोबाइल टावरों से उपकरण चोरी होने के मामले सामने आए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार गोगामेड़ी थाना क्षेत्र में गोगामेड़ी गांव के नजदीक ही लगे रिलायंस कंपनी के टावर से 17-18 जनवरी की रात को अज्ञात व्यक्ति चार ओडीसी बैटरी केबल चोरी कर ले गया। इस संबंध में कंपनी के एक तकनीकी कर्मचारी प्रेम कुमार यादव (44) निवासी मन्नीवाली थाना सादुलशहर द्वारा दी गई रिपोर्ट पर मुकदमा दर्ज किया गया है। दूसरी घटना भादरा थाना क्षेत्र के गांव धौलपालिया में 19-20 जनवरी की रात को हुई। पुलिस के अनुसार अज्ञात व्यक्ति उक्त गांव में लगे जिओ कंपनी के टावर से केबल आदि उपकरण चोरी कर ले गए।इस संबंध में शेरसिंह धाणक (36) निवासी मुंसरी थाना गोगामेडी द्वारा दी गई रिपोर्ट के आधार पर अज्ञात चोरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। इस बीच पल्लू थाना क्षेत्र के गांव लखेरा में लगे टावर से भी उपकरण चोरी होने की घटना सामने आई है। जानकारी के मुताबिक लखेरा में 20 जनवरी को सुबह 5 बजे कोई अज्ञात व्यक्ति मोबाइल टावर की एसओपी का लॉक तोड़कर उसमें लगा बीटीएस उपकरण चोरी कर ले गया। इस संबंध में टावर कंपनी के एक कर्मचारी श्योदतराम द्वारा थाने में रिपोर्ट दी गई है लेकिन अभी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। पुलिस को दी गई रिपोर्ट में बताया गया है कि 20 जनवरी की सुबह 5 बजे तकनीकी कर्मचारी रणवीर मोबाइल टावर साइट पर पहुंचा तो एस ओ पी का लॉक टूटा हुआ था। उसमें से बीटीएस गायब था। बीटीएस काफी महंगा उपकरण होता है। एक पखवाड़ा पहले भादरा शहर के हाथीपुरावास में लोगों ने रात को दो युवकों को मोबाइल टावर के उपकरण चोरी करते हुए रंगे हाथों पकड़ा था जबकि इनका एक साथी भाग जाने में कामयाब हो गया था।मौके पर से फरार हुआ कुलदीप नामक व्यक्ति अभी तक पकड़ में नहीं आया। हनुमानगढ़ जिले में एक के बाद एक मोबाइल टावरों से उपकरण चोरी हो रहे हैं।पुलिस कई-कई दिन तक चोरियों के मुकदमे दर्ज नहीं करती। भादरा में रंगे हाथों पकड़े गए चोरों से ऐसी कई वारदातों के बारे में पता चला है लेकिन पुलिस ने बाकी वारदातों के संबंध में कोई कार्यवाही नहीं की। टावर कंपनियों का लाखों-करोड़ों रुपए का नुकसान इन वारदातों में हो चुका है।जानकार सूत्रों ने बताया कि इसके पीछे बहुत बड़ा गिरोह है, जिसके तार विदेशों तक जुड़े हुए हैं। टावरों से चोरी कि उपकरण दिल्ली में इकट्ठे किए जाते हैं, जहां से बांग्लादेश भेज दिए जाते हैं।
