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श्रीगंगानगर आर्मी कैंट में सफाई कर्मियों ने ठेकेदार द्वारा आर्थिक शोषण करने के खिलाफ कार्य बहिष्कार किया

श्रीगंगानगर आर्मी कैंट में सफाई कर्मियों ने ठेकेदार द्वारा आर्थिक शोषण करने के खिलाफ कार्य बहिष्कार किया
ठेकेदार को मिलते हैं 13572 रुपए, वह सफाई कर्मी को देता है सिर्फ 9100 रुपए
– तीन महीने से वेतन नहीं, ठेकेदार से वार्ता नतीजा
श्रीगंगानगर।
श्रीगंगानगर में आर्मी कैंट (साधुवाली) में सफाई का काम करने वाले सभी 156 सफाई कर्मियों ने ठेकेदार द्वारा किए जा रहे आर्थिक शोषण के खिलाफ आज सुबह 6 से दोपहर 3 बजे तक कार्य बहिष्कार किया। इस दौरान सफाई कर्मियों की ठेकेदार से वार्ता हुई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। श्रीगंगानगर-अबोहर मार्ग पर स्थित आर्मी कैंट के गेट नंबर 1 के सामने की ऑफिसर कॉलोनी की एक गली में आज सुबह सभी सफाई कर्मी काम का बहिष्कार कर धरने पर बैठ गए। धरने में महिला कर्मी भी शामिल हुईं। आर्मी कैंट में 156 महिला और पुरुष सफाई का करें करते हैं। इनमें महिलाओं की संख्या दो दर्जन है।इनकी कंजर्वेसी सफाई कर्मचारी संघर्ष समिति है। धरने पर बैठे सफाई कर्मियों ने बताया कि उनको सिर्फ 9100 रुपए प्रति महीना वेतन ठेकेदार द्वारा दिया जाता है, जबकि ठेकेदार को प्रति कर्मचारी आर्मी से 13572 रुपए मिलते हैं। इस तरह एक कर्मचारी का एक तिहाई वेतन कर्मचारी खुद डकार रहा है। यही नहीं पिछले तीन महीने से उनको वेतन भी नहीं दिया। सफाई कर्मियों द्वारा धरना लगा देने पर ठेकेदार ने दोपहर को आर्मी कैंट में उनके प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाया। बातचीत में मासिक वेतन को लेकर काफी नेगोशिएशन हुआ। कर्मचारियों ने कहा कि वह 12 हजार 500 रुपए से कम नहीं लेंगे। इस पर ठेकेदार ने कोई जवाब नहीं दिया। इसलिए गतिरोध बना हुआ है। अलबत्ता ठेकेदार ने कहा कि पिछले 3 महीने का बकाया वेतन वह दो-तीन दिन में उनके अकाउंट में ट्रांसफर कर देगा। धरने पर बैठे सफाई कर्मियों ने बताया कि वे लगभग 10 वर्षों से आर्मी कैंट में काम कर रहे हैं। ठेकेदार बदलते रहते हैं लेकिन सफाई कर्मी ना के बराबर बदलते हैं। आर्मी कैंट में पिछले वर्ष सितंबर महीने में नए ठेकेदार को ठेका दिया गया है।नया ठेकेदार उनको 9100 रुपए मासिक वेतन देने लगा जबकि पूर्ववर्ती ठेकेदार उनको 7800 रुपए देता था। पिछले ठेकेदार ने  ठेका खत्म होने से दो-तीन महीने पहले ईमानदारी दिखाई।सफाई कर्मियों के अनुसार जाते हुए पिछले ठेकेदार ने उनको दो-तीन महीने तक उनका पूरा वेतन दिया।तब उन्हें पता चला कि ठेकेदार को आर्मी से प्रति कर्मचारी मासिक कितना पैसा मिलता है और वह कर्मचारियों को कितना देता है। इससे पहले उनको कुछ भी पता नहीं था कि प्रति कर्मचारी आर्मी द्वारा ठेकेदार को कितना पैसा दिया जाता है। कर्मचारियों के अनुसार उनका 552 रुपए प्रतिदिन के बनते हैं। इसमें ईएसआई और पीएफ का पैसा अलग है। कर्मचारियों के अनुसार पिछले ठेकेदार द्वारा अंतिम दो-तीन महीने उनका पूरा वेतन देने से उनमें जागरूकता आई है। तभी सभी ने एकजुट होकर इस आर्थिक शोषण के खिलाफ आवाज उठाई है।कर्मचारियों ने मांग की है कि उनका पूरा वेतन आर्मी स्टेशन हेड क्वार्टर द्वारा उनके बैंक अकाउंट में दिया जाए। साथ ही उनको पिछले 3 महीने का भुगतान भी दिलाया जाए। तीन महीनों से वे अपना घर का खर्च बड़ी मुश्किल से चला रहे हैं।

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