11 महीने से साइकिल यात्रा कर रहा महेंद्र बाबू का घर आने पर स्वागत, आज बाकी यात्रा पूर्ण करने रवाना होगा
श्रीगंगानगर। श्रीगंगानगर में रहकर सब्जी बेचकर मजदूरी करने वाले मूलतः यूपी के कानपुर के महेन्द्र बाबू करीब 18 हजार किलोमीटर की साइकिल यात्रा पूर्ण कर आज चक 3- ई छोटी अपने घर पहुँचा।उसका ढोल नगाड़ों लोगों ने स्वागत किया है। भाजपा नेता रजत स्वामी एडवोकेट ने बताया कि महेन्द्र बाबू करीब 11 माह से लगातार देशभर की साइकिल यात्रा पर रहा और अनेक राज्यों के जिलों से होते हुए आज वापिस घर पहुँचा। उसका फूल-मालाओं से स्वागत किया गया है। सम्पूर्ण भारत दर्शन का जज्बा लिए महेन्द्र बाबू साइकिल पर यात्रा निकला था। महेन्द्र बाबू का जन्म कानपुर में हुआ लेकिन वह 8-10 वर्षों से श्रीगंगानगर में गली गली घूमकर सब्जी बेचकर अपना गुजारा कर रहा है। उसके पत्नी ,दो बेटियां और एक भाई है। सभी 3 ई छोटी में रहते है।महेन्द्र बाबू ने सफेद टी शर्ट पर अपने माता पिता की फोटो लगाकर साईकिल से यात्रा करते हुए सन्देश दिया है कि जिस माता-पिता ने बच्चों को पढ़ाया- लिखाया, वही बच्चे माता पिता को घर से निकाल देते हैं। ऐसे काम समाज में कुरीतियों को बढ़ावा देते हैं। साइकिल यात्रा के दौरान गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने, प्रदूषण रहित भारत और प्लाटेंशन फॉर नेचर जैसे महत्वपूर्ण संदेशों का प्रचार का उसने प्रचार किया। अब कल शनिवार को महेन्द्र बाबू श्रीगंगानगर से गोगामेड़ी होते हुए महाकुंभ प्रयागराज में साइकिल से रवाना होंगे। उसकी अभी करीब डेढ़ साल की साइकिल यात्रा बाकी है। अब वह डेढ़ साल बाद यात्रा पूर्ण कर घर लौटेगा।आज चक 3 ई छोटी घर आने पर दूध सप्लाई यूनियन प्रधान सुभाष स्वामी, सरपंच प्रतिनिधि अमीलाल सीगड़, मोनू गर्ग, रजत स्वामी एडवोकेट,दीपक दुपगा, जयदेव शर्मा, महेन्द्र बाबू की पत्नी निशा, बेटियां लवी एवं पल्लवी, भाई लाइकसिंह, मिथुनसिंह, राजू, गुलशन, सौरभ शुक्ला, राजेन्द्र शर्मा पुजारी, पवन सेतिया आदि ने स्वागत किया है।
