पिता की फर्जी वसीयत बनाकर संपत्ति हड़पने का षड्यंत्र रचने के आरोप में लुधियाना वासी डॉक्टर पुत्र गिरफ्तार
– पुलिस ने अदालत में पेश कर तीन दिन का रिमांड लिया
श्रीगंगानगर। श्रीगंगानगर में अनेक वर्षों तक विश्व हिंदू परिषद(विहिप) के जिलाध्यक्ष रहे स्व. मोहनलाल गोयल के लुधियाना (पंजाब) डॉक्टर पुत्र को पुलिस ने फर्जी वसीयत से अपने पिता की संपत्ति हड़पने का षड्यंत्र रचने के आरोप में गिरफ्तार किया है। लगभग 4 वर्ष पहले स्थानीय जवाहरनगर थाना में सुखाड़ियानगर निवासी दीपक गोयल द्वारा दर्ज करवाए मुकदमे की जांच कर रहे श्रीकरणपुर के डीएसपी संजीव चौहान ने गिरफ्तार किए लुधियाना वासी डॉ. सुदर्शन कुमार गोयल को आज यहां की एक अदालत में पेश किया।डीएसपी चौहान ने बताया कि अदालत ने डॉ. गोयल का 24 फरवरी तक का रिमांड मंजूर किया है। रिमांड अवधि के दौरान उससे हनुमानगढ़ नगरपरिषद में संपत्ति के नामांतरण के लिए पेश की गई फर्जी वसीयत के बारे में पूछताछ की जाएगी। पूछताछ में खुलासा होने की संभावना है कि फर्जी वसीयत कब,कैसे और कहां किसके सहयोग से बनाई गई थी।डा. सुदर्शन गोयल फिलहाल लुधियाना में भाई रणजीतसिंहनगर में अपने डाक्टर पुत्र के अस्पताल में कार्यरत था। इससे पहले वह हनुमानगढ़ टाउन में रावतसर रोड पर दिल्ली वाला अस्पताल के नाम से हॉस्पिटल चलाते था। उन्होंने श्रीगंगानगर में तपोवन अस्पताल तथा पंजाब के संगरूर जिले में दडिबां तहसील क्षेत्र में बाबा बैरिसियान चैरिटेबल ट्रस्ट हॉस्पिटल में भी कार्य किया है।
यह है पूरा मामला
दीपक गोयल द्वारा अदालत में दायर किए गए इस्तगासा के आधार पर 1 मार्च 2021 को जवाहरनगर थाना में सुदर्शन कुमार गोयल, सतीश कुमार गोयल निवासी सेक्टर नंबर 17 पंचकूला (हरियाणा), विपिन अग्रवाल निवासी एच ब्लॉक श्रीगंगानगर और रामकुमार निवासी गोयल मेडिकल एजेंसी हनुमानगढ़ पर षड्यंत्र रचकर उसके दादा मोहनलाल गोयल की फर्जी वसीयत बनाकर हनुमानगढ़ नगर परिषद में पेश करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। दीपक गोयल ने बताया कि उसके दादा मोहनलाल स्थानीय 17 पब्लिक पार्क में निवास करते थे। उनका 90 वर्ष की आयु में 5 दिसंबर 2017 को देहांत हो गया था। उनकी श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में स्वयं अर्जित संपत्तियां थीं। अपने जीवन काल में उन्होंने अपनी संपत्तियों में से कुछ संपत्तियों की रजिस्टर्ड वसीयत और उपहार पत्रों से अपने पारिवारिक सदस्यों के नाम कर दी थी। सुदर्शन कुमार और सतीश कुमार ने उसके दादा के जीवित रहते अपना हिस्सा और हक हकूक लेकर परिवार से अलग हो गए थे। हनुमानगढ़ टाउन में महात्मा गांधी राज्य के चिकित्सालय के सामने जनरल मार्केट में दुकान 412/2 साइज 40 णुणा 12.5 की वसीयत उसके दादा ने 17 सितंबर 2005 को सब रजिस्टार श्रीगंगानगर के यहां उसके तथा श्रीमती शशि गोयल और श्रीमती विजय गोयल के पक्ष में बहिस्सा बराबर रजिस्टर्ड करवाई थी। उक्त संपत्ति उन्होंने उसे तथा श्रीमती शशि गोयल व श्रीमती विजय गोयल को दे दी थी। दीपक गोयल के अनुसार उसके दादा मृत्यु से लगभग तीन-चार वर्ष पहले से अस्वस्थ चल रहे थे। विगत 5 दिसंबर 2017 को मृत्यु होने से 10-15 दिन पहले वह बेहोश हो गए थे। वह हिलने-डुलने की स्थिति में नहीं थे। मानसिक और शारीरिक रूप से कुछ भी समझाने बुझाने की हालत में भी नहीं थे। वह चारपाई पर रहते हुए मृत्यु को प्राप्त हुए थे। दादा के देहांत के बाद उसने हनुमानगढ़ टाउन कि उक्त दुकान में अपने एक तिहाई हिस्से को अपने नाम नामांतरण करवाने के लिए 27 सितंबर 2005 की रजिस्टर्ड वसीयत के आधार पर हनुमानगढ़ नगर परिषद में तमाम औपचारिकताएं और कागजात पूर्ण करते हुए आवेदन किया। काफी समय बीतने पर भी जब नामांतरण उसके नाम नहीं किया गया तो नगर परिषद से लिखित में पत्र लिखकर जवाब मांगा।नगर परिषद ने बताया कि उसके नामांतरण आवेदन पर सुदर्शन कुमार गोयल ने 13 जनवरी 2018 को आपत्ति प्रस्तुत की है। दीपक गोयल के मुताबिक सुदर्शन कुमार और सतीश कुमार ने मिलीभगत कर व्हाट्सएप के एक मैसेज के आधार पर हनुमानगढ़ की एक अदालत में सिविल वार्ड भी दायर कर दिया। यही नहीं सुदर्शन कुमार गोयल ने 5 फरवरी 2018 को हनुमानगढ़ नगर परिषद में एक वसीयत प्रस्तुत कर उक्त दुकान को अपने नाम नामंतरित करने के लिए आवेदन किया। उसने जब नगर परिषद हनुमानगढ़ से सूचना के आधार के तहत सुदर्शन कुमार गोयल द्वारा नामांतरण के किए गए आवेदन की मूल पत्रावली की प्रमाणित प्रति प्राप्त की तो पता चला कि इसमें उसके दादा मोहनलाल की लगाई गई वसीयत फर्जी तथा कूटरचित है। उसके द्वारा पेश की गई वसीयत पर 28 नवंबर 2017 की तारीख अंकित थी जबकि उसे दिन उसके दादा बेहोश थे। वे चारपाई पर भी हिल-डुल नहीं सकते थे। सुदर्शन कुमार गोयल द्वारा नामांतरण के लिए पेश की गई वसीयत ना तो नोटरी से प्रमाणित थी और ना ही रजिस्टर्ड थी। उस पर गवाह के नाम बाद में हाथ से अंग्रेजी में लिखे गए।किसी भी गवाह का संपूर्ण पता नहीं लिखा गया। वसीयत को टाइप किया गया और टाइप में भी स्पेस देकर अक्षरों को छोटा बड़ा किया हुआ था। जब यह वसीयत पेश की गई, उस समय सुदर्शन कुमार गोयल श्रीगंगानगर में अग्रसेननगर में रहता था। इसीलिए यह मामला अदालत के आदेश पर जवाहरनगर थाना में दर्ज हुआ। इसकी जांच सब इंस्पेक्टर आदेश कुमार के सुपुर्द की गई थी।
एक आरोपी विदेश में छुपा!
इस मामले का एक आरोपी स्थानीय एच-ब्लॉक निवासी विपिन अग्रवाल के विदेश में छुपे होने की आशंका है। जांच अधिकारी डीएसपी संजीव चौहान ने बताया कि विपिन अग्रवाल काफी समय से देश में नहीं है। अन्य सूत्रों ने बताया कि विपिन के परिवारजन न्यूजीलैंड में रहते हैं। उसके पास न्यूजीलैंड की परमानेंट रेजिडेंटशीप(पीआर) नहीं है। वह अढ़ाई महीने न्यूजीलैंड में रहकर कुछ दिन वापस गुपचुप भारत में आकर फिर न्यूजीलैंड चला जाता है। परिवादी दीपक गोयल के मुताबिक उसने बीते 4 वर्षों के दौरान पुलिस अधिकारियों को दर्जनों पत्र लिखे हैं। विपिन अग्रवाल के आधार और पैन कार्ड आदि संबंधी सारी जानकारियां दी हुई हैं। फिर भी उसका पासपोर्ट जब्त नहीं किया जा रहा। वह बार-बार न्यूजीलैंड आ जा रहा है। डीएसपी चौहान ने बताया कि पुलिस की ओर से विपिन अग्रवाल का लुक आउट नोटिस जारी करवाया हुआ है, लेकिन वह पकड़ में नहीं आ रहा।
चार वर्ष में अनेक अधिकारियों ने की जांच
इस बहुचर्चित मामले की बीते चार वर्षों के दौरान पुलिस के अनेक अधिकारियों द्वारा जांच की गई शुरुआत में सब इंस्पेक्टर आदेश कुमार ने जांच की। बाद में प्रशांत कौशिक, अरविंद बैरड, प्रशिक्षु आईपीएस रमेश और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती सुधा पालावत ने जांच की। अब पिछले लगभग पौने दो वर्ष से मामले की जांच श्रीकरनपुर के डीएसपी संजीव चौहान के पास है। उन्होंने बताया कि प्रस्तुत फर्जी वसीयत के एक गवाह रामकुमार को सितंबर 2023 में गिरफ्तार कर लिया गया था। पूर्ववर्ती जांच अधिकारियों ने सतीश कुमार गोयल को दोषी नहीं माना।
गिरफ्तारी को छुपाने का प्रयास
लगभग 4 वर्ष तक घसीट-घसीट कर हुई इस मामले की जांच के बाद दोषी पाए गए डॉ. सुदर्शन कुमार गोयल की गिरफ्तारी को जिला पुलिस ने छुपाने का भी प्रयास किया। पुलिस अधीक्षक ऑफिस से रोजाना सुबह मीडिया के लिए एक बुलेटिन जारी होता है, जिसमें पिछले 24 घंटे के दौरान हुई गिरफ्तारियां की जानकारी दी जाती है। आज के बुलेटिन में डॉ. सुदर्शन गोयल की गिरफ्तारी का उल्लेख नहीं किया गया था। पुलिस अधिकारी डॉ. गोयल की गिरफ्तारी को छुपाने की भरसक कोशिश करते रहे। डॉ गोयल को कल दोपहर बाद ही गिरफ्तार कर लिया गया था। इस बारे में पूछने पर पुलिस टालमटोल करती रही।
