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ग्राम पंचायत चक 29-डीडब्ल्यूडी में गड़बड़झाला, निर्माण कार्यों की ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया को ताक पर रखा

ग्राम पंचायत चक 29-डीडब्ल्यूडी में गड़बड़झाला, निर्माण कार्यों की ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया को ताक पर रखा
– ग्राम विकास अधिकारी और सरपंच के खिलाफ मुकदमा दर्ज
श्रीगंगानगर।
हनुमानगढ़ जिले में पंचायत समिति रावतसर के अधीन ग्राम पंचायत चक 29-डीडब्ल्यूडी में 11 निर्माण कार्यों की ऑनलाइन टेंडर की प्रक्रिया को ग्राम विकास अधिकारी समेत और सरपंच द्वारा ताक पर रख दिए जाने का एक संगीन मामला उजागर हुआ है।पुलिस के मुताबिक अर्जुनकुमार जाट निवासी चक 11- एनडब्ल्यूडी  तहसील रावतसर द्वारा अदालत में दायर किए गए इस्तगासा के आधार पर चक 29 डीडब्ल्यूडी ग्राम पंचायत की ग्राम विकास अधिकारी शकीला बिश्नोई और सरपंच अमित कुमार के विरुद्ध धोखाधड़ी तथा जालसाजी की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। अर्जुन कुमार जाट ने इस्तगासा में बताया है कि उसकी मैसेज जीजी इंडस्ट्रीज चक 21- 22 डीडब्ल्यूडी के नाम से फर्म है, जिसका वह प्रोपराइटर है। विगत 8 जुलाई 2022 को ग्राम पंचायत चक 29-डीडब्ल्यूडी द्वारा ई-निविदा 01/2022-23 जारी की गई,जिसके तहत ग्राम पंचायत में 11 विभिन्न कार्यों के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए थे।उसने निर्धारित अवधि में उक्त 11 कार्यों के अनुमानित बजट की  2 प्रतिशत अमानत राशि कल 1 लाख 37 हजार 120 के अलग-अलग डिमांड ड्राफ्ट तथा अन्य शुल्क सहित कुल एक लाख 47 हजार रुपए 2020 जमा करवा दिए। इसके साथ ही उसने उक्त कार्यों के लिए ई-टेंडर भी ऑनलाइन भर दिया। इस बारे में ग्राम विकास अधिकारी शकील बिश्नोई से बात की तो उसके कहने पर टेंडर संबंधी अन्य मूल दस्तावेज मनरेगा एलडीसी को सौंप दिए।ग्राम विकास अधिकारी ने कहा कि वह अपने आप सारा प्रोसेस पूरा कर लेंगी। इसके बाद वह लगातार चक्कर काटता रहा लेकिन ग्राम विकास अधिकारी द्वारा कोई प्रोसेस नहीं की गई। उसने पंचायत समिति रावतसर के विकास अधिकारी को अवगत करवाया। उनको लिखित में पत्र भी लिखे। इस पर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई बल्कि आजकल-आजकल कहकर टालते रहे। इस बीच 7 अक्टूबर 2022 को उक्त कार्यों का टेंडर खोलने के लिए पंचायत समिति के विकास अधिकारी को  प्रार्थना पत्र दिया तो उसके मोबाइल पर मैसेज आया कि उसका टेंडर निर्माण कार्य में शामिल ही नहीं किया गया। अर्जुन कुमार जाट ने इस्तगासा में आरोप लगाया है कि ग्राम विकास अधिकारी और सरपंच ने आपस में मिलीभगत कर अपने किसी निजी व्यक्ति की फर्म को उक्त कार्यों का टेंडर काफी ऊंचे रेट पर दे दिया। उसके टेंडर को प्रक्रिया में शामिल ही नहीं किया गया। उसके मूल दस्तावेज डिमांड ड्राफ्ट भी खुर्द-बुर्द कर दिए,जिससे उसे 1लाख 47 हजार रुपए का आर्थिक नुकसान हुआ। अर्जुन कुमार ने आरोप लगाया है कि सरपंच और ग्राम विकास अधिकारी ने मिलीभगत कर उक्त कार्यों में जमकर भ्रष्टाचार किया है। पुलिस ने धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच एएसआई शीशपाल के सुपुर्द की है।

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