रंगे हाथों नहरी पानी की चोरी करते पकड़े किसानों के विरुद्ध कार्यवाही नहीं होने पर पुलिस के खिलाफ आक्रोश
– गुरुद्वारा सिंह सभा में बैठक के बाद किसानों ने कलेक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन, पानी चोरों की गिरफ्तारी की मांग
श्रीगंगानगर। जिले के केसरीसिंहपुर थाना क्षेत्र में गंग कैनाल की एफ नहर की बुर्जी संख्या 137 के नजदीक सवा महीने पहले रात्रि को नहरी पानी की चोरी रंगे हाथों पकडे गए दो किसान भाइयों के खिलाफ दर्ज मुकदमे में कोई कार्यवाही नहीं किए जाने को लेकर किसानों में आक्रोश व्याप्त है। आज बड़ी संख्या में किसानों ने गुरुद्वारा सिंह सभा में बैठक करने के बाद पानी चोरी के दोषी किसानों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं करने वाले केसरीसिंहपुर थाना प्रभारी को निलंबित करने की मांग करते हुए कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। किसानों के शिष्टमंडल ने जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन देकर सारे मामले से अवगत करवाया। किसानों ने कुछ देर कलेक्ट्रेट पर धरना भी दिया। गुरुद्वारासिंह सभा में हुई बैठक में गंग कैनाल प्रोजेक्ट चेयरमैन हरविंदरसिंह गिल, अखिल भारतीय किसान सभा के जिला प्रवक्ता रवींद्र तरखान,चमकौरसिंह तथा विक्रमजीत सिंह आदि किसान नेताओं ने संबोधित किया। उन्होंने नहरी पानी चोरी के उक्त मामले के सारे तथ्य उपस्थित किसानों के समक्ष रखें। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक, विभागीय और पुलिस संरक्षण के चलते पानी चोरी करने वालों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की जा रही। उल्टा पानी चोरी पकड़ने वाले किसानों पर ही पानी चोरों ने मुकदमा दर्ज करवा दिया। वक्ताओं ने इस झूठे मुकदमे में अंतिम प्रतिवेदन(एफआर) लगाने की मांग की है। किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर पुलिस ने जल्दी सख्त कार्यवाही नहीं की तो कड़ा आंदोलन किया जाएगा।
यह है सारा मामला
जल उपभोक्ता संगम के अध्यक्ष हरप्रीतसिंह ढिल्लों तथा उनके साथी किसानों ने तीन-चार दिसंबर की रात लगभग 10 बजे गंग कैनाल की एफ नहर की बुर्जी संख्या 137 (चक 36 एफ) मोघा के पास 10 इंच की पाइप लगाकर पानी चोरी करते हुए दो-तीन किसानों को पकड़ा था। मौके पर मौजूद किसानों ने पानी चोरी होते के वीडियो बनाए। वीडियो सोशल मीडिया में भी वायरल हुए। अगले दिन सहायक अभियंता रेखा मीणा की रिपोर्ट पर बलविंदरसिंह और बलजीत सिंह (पुत्र हरमंदिर सिंह)के विरुद्ध केसरीसिंहपुर थाना में नहरी पानी चोरी करने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पानी पकड़ने वाले किसानों पर जानलेवा हमला करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया। इस मामले में जल संसाधन विभाग के अधिशासी अभियंता उत्तराखंड द्वारा सहायक अभियंता एवं संबंधित जल उपयोक्ता संगम से रिपोर्ट मिलने पर 20 दिसंबर को बलजिंदरसिंह वगैरा किसानों के पानी की बारी एक वर्ष तक के लिए काट दी और नाजायज आबपाशी के लिए 20 गुना तावान (जुर्माना) आयद किया। अधिशासी अभियंता ने तमाम तथ्यों की जांच करवारकर उक्त काश्तकार को पानी चोरी करने का दोषी प्रमाणित पाया। इसीलिए एक वर्ष के लिए सिंचाई बारी काट दी गई और 20 गुना तावान राशि लगाई गई। इसके जवाब में तीन-चार दिन पूर्व पानी की चोरी पकड़ने वाले जल उपभोक्ता संगम अध्यक्ष हरप्रीतसिंह ढिल्लों आदि किसानों के खिलाफ अपनी चोरी करने वाले किसान ने परस्पर मुकदमा दर्ज करवा दिया, जिसमें ट्रैक्टर चढ़ाकर मारने की कोशिश करने आदि के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इसी कारण किसानों में भारी आक्रोश है।आज की बैठक में वक्ताओं ने कहा कि पुलिस पानी चोरी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रही बल्कि पानी चोरी करने वालों की तरफ से पानी चोरी पकड़ने वाले किसानों पर झूठे मुकदमे दर्ज कर रही है। वक्ताओं ने उन लोगों की भी कड़ी निंदा की जो पानी चोरी करने वाले किसानों की हिमायत कर रहे हैं।
पानी चोरी के साढे पांच सौ मामले पकड़े
गंग कैनाल प्रोजेक्ट के चेयरमैन हरविंदरसिंह गिल ने गुरुद्वारा सिंह सभा में हुई किसानों की बैठक को संबोधित करते हुए बताया कि जब से वे प्रोजेक्ट चेयरमैन बने हैं,तब से लेकर अब तक गंग कैनाल की मुख्य शाखा और इसकी वितरिकाओं में अवैध रूप से पाईपें और अन्य उपकरण लगाकर पानी चोरी किए जाने के लगभग 550 मामले पकड़े हैं। खखां हैड से शिवपुर हैड के बीच पिछले वर्ष पानी चोरी को रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया गया। तीन दिन लगातार कार्रवाई की गई जिस दौरान पानी चोरी के लिए लगाई हुई 100-150 पाइपें जब्त की गईं। पानी चोरी करने वालों के खिलाफ मुकदमे दर्ज करवाए गए। पुलिस ने 8 महीने तक कोई कार्यवाही नहीं की। वर्ष के अंतिम दिन 31 दिसंबर को पानी चोरी के प्रकरणों का पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया।उन्होंने कहा कि पुलिस पानी चोरी के मामले दर्ज नहीं करती। दर्ज करती है तो उसमें उपर्युक्त धाराएं नहीं लगातीं। कई-कई महीने तक जांच को लटकाए रखती है। जल संसाधन विभाग के अधिकारी भी पानी चोरों के खिलाफ सख्त कार्यवाही नहीं करते। अधिकारी पानी चोरी करने वाले किसानों की सिंचाई की बारियां काट देते हैं लेकिन अपने आदेश की पालना नहीं करवाते। चक 36 एफ के मोघे के मामले में भी ऐसा ही हुआ है।अभी तक दोषी किसान के खेत की सिंचाई पानी की बारी बंद नहीं की गई है। श्री गिल ने कहा कि पानी की चोरी और पानी चोरों को पकड़ना प्रोजेक्ट चेयरमैन, जल उपभोक्ता और जल उपयोक्ता संगम अध्यक्षों अथवा आम किसानों का काम नहीं है।यह काम सिंचाई विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों का है,जो कि वह करते नहीं हैं। अभी तक 550 मामले जो पकड़े हैं,वह खुद किसानों ने ही पकड़े हैं। विभाग ने एक भी पानी चोरी का मामला नहीं पकड़ा। यही नहीं जिन नहरों में पानी चोरी हो रहा है, उन नहरों के जिम्मेदार कनिष्ठ अभियंताओं और सहायक अभियंताओं को इसके लिए कभी भी चार्जशीट नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जल संसाधन विभाग के अधिकारी पानी चोरी करने के आदि किसानों पर पकड़े जाने के बाद भी तत्काल और प्रभावी कार्रवाई नहीं करते। ऐसे किसानों के खिलाफ अधिकारी पानी की बड़ी काटने के आदेश तो जारी कर देते हैं लेकिन कई-कई दिन तक उसकी पालना नहीं कराते, जिससे दोषी किसान अदालत से स्टे आर्डर प्राप्त कर लेता है। विभाग में अनेक मामलों में स्टे आर्डर के कारण कार्यवाही नहीं हो रही। अधिकारी स्टे आर्डर को खत्म करवाने का प्रयास भी नहीं करते।
