पांच बीघा कृषि भूमि हड़पने के लिए सालेहर को बहन बनाया
कोर्ट के आदेश पर दोबारा जांच, 7 वर्ष बाद भाई गिरफ्तार
श्रीगंगानगर,19 नवंबर। पैतृक कृषि भूमि में से हिस्सा नहीं देना पड़े, इसलिए एक शख्स ने अपनी सालेहर को बहन बनाकर दस्तरबरदारी के कागजात तैयार कर जमीन अपने नाम करवा ली। बहन और सालेहर दोनों का ही नाम एक नहीं है बल्कि पिता के नाम भी एक ही हैं इसी बात का इस शख्स ने फायदा उठाया। पुलिस ने पहले इस मामले की जांच बहुत ही संदिग्ध तरीके से की और अंतिम प्रतिवेदन (एफआर) लगा दिया। पीड़ित बहन द्वारा अदालत में चुनौती देने पर दोबारा मामले की जांच के आदेश दिए गए। तब तक थाने का स्टाफ बदल चुका था। नए जांच अधिकारी ने दूध का दूध और पानी का पानी करते हुए 7 वर्ष बाद आरोपी भाई को गिरफ्तार कर लिया जबकि तीन अन्य के खिलाफ जांच अभी लंबित है। कृषि भूमि हड़पने का यह दिलचस्प मामला केसरीसिंहपुर थाना क्षेत्र का है। जांच कर रहे एएसआई हरपाल ज्याणी ने बताया कि चक 13-एच निवासी कुलवीरसिंह (पुत्र गुरदयालसिंह)को गिरफ्तार कर आज अदालत में पेश किया गया। इस मामले में उसके भाई तथा जमीन की रजिस्ट्री के दो गवाहों के खिलाफ जांच अभी लंबित है। उन्होंने प्रकरण की जानकारी देते बताया कि कुलवीरसिंह की बहन परमजीतकौर पंजाब के जालंधर जिले में मलसिंह गांव में विवाहित है। कई वर्ष पहले कुलवीरसिंह और उसके भाई ने परमजीत कौर से 10-12 लख रुपए उधार लिए थे। दोनों भाइयों ने बहन को रुपए वापस नहीं किये। इसके चलते बहन भाइयों में अनबन हो गई। एक दूसरे के यहां आना-जाना ही नहीं बल्कि बोलचाल भी बंद हो गई। जांच अधिकारी के मुताबिक परमजीतकौर का अपने पिता गुरदयालसिंह की जमीन में हिस्सा बनता था जो कि 5 बीघा था। यह हिस्सा नहीं देना पड़े,इसके लिए दोनों भाइयों ने षड्यंत्र रचा। कुलवीरसिंह का एक साला सदर थाना अंतर्गत रीको उद्योग विहार के समीप चक 13-एलएनपी में रहता है। उसकी पत्नी का नाम परमजीत कौर है और संयोगवश उसके पिता का नाम भी गुरदयालसिंह है। कुलबीर ने अपने भाई के साथ मिलकर इस परमजीतकौर से उक्त जमीन की दफ्तरबरदारी(हक त्याग)अपने नाम करवा ली। फिर इसी परमजीतकौर की फोटो कागजातों पर लगाकर उसे अपनी बहन बताते हुए उक्त जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम करवा ली। उधर वास्तविक बहन परमजीत कौर को अपने भाइयों की इस कारास्तानी का पता चला तो उसने 2018 में केसरसिंहपुर थाने में रिपोर्ट दी, जिसके आधार पर धोखाधड़ी तथा जलसाजी का मामला दर्ज किया गया। पुलिस के मुताबिक इस मामले की जांच शुरू हुई तो आरोपी भाइयों कुलवीरसिंह व जगवीरसिंह ने रीको के पास रहने वाली परमजीतकौर को ही अपनी बहन बता कर थाने में राजीनामा पेश करवा दिया। यही नहीं तत्कालीन जांच करने वाली पुलिस ने इस मामले में सीआरपीसी की धारा 161 के तहत वास्तविक पीड़िता के बयान दर्ज करने में भी बड़ी संदिग्ध भूमिका निभाई। मामले की गहराई से जांच नहीं करने और संदिग्ध भूमिका के चलते पुलिस ने प्रकरण को झूठा मानते हुए अदालत में एफआर पेश कर दी। एफआर पेश होने का जब वास्तविक पीड़िता परमजीतकौर को अदालत से नोटिस मिला तो वह हैरान रह गई क्योंकि पुलिस ने उसे जांच में शामि पूर्ण रूप से नहीं किया था। उसने एफआर को अदालत में चुनौती दी तो मामले की दोबारा जांच के आदेश दिए गए। इसके बाद भी काफी समय तक दोबारा जांच के आदेश की फाइल भी थाने के रिकॉर्ड में दबी पड़ी रह गई। पिछले दिनों वास्तविक पीड़िता परमजीतकौर ने थाने में आकर गुहार लगाई तो पुरानी फाइल को बाहर निकला गया। इस मामले की जांच एएसआई हरपाल ज्याणी को दी गई। उन्होंने सारे मामले के तत्थों को बारीक और गहराई से समझा तो उक्त सारा षड्यंत्र उजागर हो गया। उन्होंने बताया कि कुलवीरसिंह और उसके भाई जगबीरसिंह ने अपनी बहन के हिस्से की पांच बीघा जमीन हड़पने के लिए रीको के पास रहने वाली परमजीतकौर को ही अपनी बहन बना लिया जो कि वास्तव में कुलवीरसिंह की सालेहर है। इस पर कुलवीरसिंह को कल शाम गिरफ्तार कर लिया गया।उसके भाई तथा जमीन की रजिस्ट्री के दो गवाहों को भी दोषी माना गया है। उनकी भी गिरफ्तारी शिखर ही संभावित है।वर्ष 2018 में जब यह मामला दर्ज हुआ था तब केसरीसिंहपुर थाना के प्रभारी सीआई विजेंद्र सीला और उनके रीडर बाबू खान थे। विजेंद्र सीला फिलहाल श्रीगंगानगर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की चौकी में पद स्थापित हैं।
