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रेल गाड़ियों में यात्रियों के गहने चोरी करने वाले उत्तरप्रदेश व उत्तराखण्ड के शातिर गिरोह का खुलासा

रेल गाड़ियों में यात्रियों के गहने चोरी करने वाले उत्तरप्रदेश व उत्तराखण्ड के शातिर गिरोह का खुलासा
सरगना सहित 8 सदस्य गिरफ्तार
श्रीगंगानगर। रेल गाड़ियों में यात्रियों के गहने और अन्य सामान चोरी करने वाले उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के शातिर बदमाशों के एक गिरोह का जीआरपी पुलिस ने खुलासा किया है। गिरोह के सरगना सहित आठ सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। जीआरपी के पुलिस अधीक्षक अभिजीत सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में मारुफ अली(66) पुत्र एवज अली निवासी कोतवाली जिला बिजनौर, गम्भीरसिंह चौधरी उर्फ नागराज(50) पुत्र जसबहारसिंह निवासी हल्दौर जिला बिजनौर हाल हापुड़ उत्तरप्रदेश, इकबाल अहमद अंसारी(53) पुत्र हबीब अहमद  निवासी नेहटोर जिला बिजनौर, नौशाद उर्फ गुड्डु(44) पुत्र जिलानी उर्फ राव, शरीफ रहमान(52) पुत्र जिल्लू रहमान, वसीम अहमद खान(42) पुत्र रशीदनिवासी सिविल  लाईन जिला हरिद्वार उतराखण्‍ड एवं महावीरसिंह(35) पुत्र रामगोपाल धीमर व अनिल कुमार(28) पुत्र मुकेश कुमार लोदी (28) निवासी छर्रा जिला अलीगढ उत्तरप्रदेश है।गिरफ्तार आरोपियों के विरूद्ध पूर्व में भी कई प्रकरण दर्ज होना पाया गया है। इस गिरोह द्वारा देश के कई राज्यों में चोरी की वारदात किये जाने की संभावना के चलते पुलिस इनसे पूछताछ कर रही है।एसपी सिंह ने बताया कि  विगत 13 दिसम्बर को सोजतरोड निवासी कंचनदेवी (52) द्वारा रिपोर्ट दी गई थी कि 11 दिसंबर को वह अपनी परिचित हेमा के साथ सुबह 8 बजे जोधपुर रेल्वे स्टेशन से सोजत रोड़ के लिए जोधपुर इंदौर पैसेंजर ट्रेन में बैठी थी। उसके पास एक बैग था, जिसमे 164 ग्राम सोने के गहने रखे थे। बैग को उसने सीट के नीचे रख दिया। सोजत रोड़ रेल्वे स्टेशन उतरकर बैग चैक किया तो उसमें रखे गहनों के बॉक्स से गहने गायब थे। पीड़ित महिला ने बासनी रेलवे स्टेशन पर उतरे कुछ लड़कों पर चोरी का शक जताया। रिपोर्ट पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।

पुराने चोरों का लिया गया सहारा

ट्रेनों में यात्रियों के लगातार सोने के जेवरों की चोरी की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए एसपी अभिजीतसिंह ने उप अधीक्षक पुलिस जीआरपी जोधपुर सन्दीपसिंह के सुपरविजन एवं एसएचओ भवंरलाल के नेतृत्व में हेड कांस्टेबल सुभाषचन्द्र, कांस्टेबल रिडमलसिंह, मोहनलाल, राजूराम व चालक हैड कांस्टेबल महीराम एवं साइबर सेल से हेड कांस्टेबल दीपेन्द्रपाल सिंह की विशेष टीम का गठन किया था।पुलिस अधीक्षक ने बताया कि उक्त घटना का अंजाम देने वाले आरोपी पूर्णतया अज्ञात होने से मुल्जिमों की पहचान करना बहुत मुश्किल कार्य था। विशेष टीम द्वारा पूर्व में सजायाफ्ता अपराधियों से इस प्रकार की वारदात करने वाले अपराधियों की जानकारी प्राप्त की। विभिन्न रेल्वे स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज चैक किये एवं अन्य तकनीकी पहलुओं का विष्लेषण किया जाकर पूर्ण नियोजित योजना से उक्त आपराधिक गिरोह को काबू किया गया। गिरोह के सदस्यो से पूछताछ की गई तो उन्होने वारदात किया जाना स्वीकार किया।

वारदात का तरीका

इस गिरोह के सदस्य ट्रेनों के जनरल कोच में सफर करते हैं। गिरोह के  8-9 सदस्य ट्रेन स्टेशन पर लगते ही एक केबिन में पहले से ही सीटे रोक कर बैठ जाते हैं। जैसे ही केबिन में कोई महिला यात्री आती है, गिरोह का एक सदस्य अपनी सीट उस महिला यात्री को दे देता है। बाकी महिला के पास में ही अपनी सीट पर बैठे रहते है। गिरोह का सरगना खिड़की वाली सीट पर बैठता।महिला यात्री का सामान सीट के नीचे की तरफ रखवा देते तथा मौका पडने पर उसके सामान को चोरी-छिपे अन्तिम सीट पर बैठे गिरोह के मुखिया की ओर खिसका देते है। गिरोह का मास्टर बैग की तलाशी ले रहा होता है, बाकी सदस्य महिला को बातों में उलझाए रखते।
बैग से जेवरात निकालकर बैग वापिस वहीं रख देते है, जहां पहले था। वारदात करते ही गिरोह के सभी सदस्य अगले रेल्वे स्टेशन पर उतर अपने गृह प्रदेश जाकर आपस में चोरी गये माल का बंटवारा कर लेते।

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