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श्रीगंगानगर में फर्जी लोन एवं इंश्योरेंस कॉल सेंटर का भंडाफोड़, चार युवतियां सहित आधा दर्जन गिरफ्तार

श्रीगंगानगर में फर्जी लोन एवं इंश्योरेंस कॉल सेंटर का भंडाफोड़, चार युवतियां सहित आधा दर्जन गिरफ्तार

ऑपरेशन साइबर शील्ड के तहत पुलिस की बड़ी कार्यवाही

संत कृपालनगर के मकान में चल रहा था कॉल सेंटर

श्रीगंगानगर। पुलिस ने एक जनवरी से 1 महीने के लिए शुरू किए गए ऑपरेशन साइबर शील्ड के तहत श्रीगंगानगर में एक फर्जी लोन एवं इंश्योरेंस कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। कोतवाली थाना इलाके के संत कृपालनगर के एक मकान में गोपनीय तरीके से यह कॉल सेंटर चल रहा था, जिस पर पुलिस ने छापा मारकर चार युवतियों सहित आधा दर्जन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। इस कॉल सेंटर की मास्टरमाइंड बिहार मूल एक युवती है, जो पिछले 5 वर्षों से श्रीगंगानगर में रह रही है।

कोतवाली के प्रभारी सीआई पृथ्वीपालसिंह ने बताया कि अभी तक की पूछताछ और कॉल सेंटर से जब्त किए सामान व रिकॉर्ड से लगभग एक करोड़ 25 लाख की धोखाधड़ी व जालसाजी सामने आई है। अभी सारे रिकॉर्ड की जांच तथा कुछ बैंक खातों से जानकारी जुटाना बाकी है। उन्होंने बताया कि सेतिया कॉलोनी पुलिस चौकी प्रभारी एएसआई कृष्णचंद की अगुवाई में सिपाही प्रवीण,सुभाष, बलवंत, वेदप्रकाश मीणा और लेडी कांस्टेबल सुनीता की टीम ने कल शाम को संत कृपालनगर की गली नंबर 1 में बने दो मंजिला एक मकान पर छापा मारा, जहां नरेश शाक्य (32) पुत्र मदनलाल निवासी चक 13- जैड़ श्रीकरनपुर रोड, रेशमा खातून (33) पत्नी स्व. अनिल मिश्रा निवासी यूआईटी कॉलोनी बीएसएनल ऑफिस के समीप पुरानी आबादी, अनुराधा उर्फ खुशबू (30) पत्नी राजेश ब्राह्मण निवासी पारीक कॉलोनी तीन पुली के समीप चक 4-जैड, लवप्रीत उर्फ प्रीत मजहबी सिख (19) पुत्री सुखदेवसिंह निवासी चक्र 9-एच संगतपुरा,अन्नू राजपूत (21) पुत्री कालूसिंह निवासी भरतनगर पुरानी आबादी और गगनदीप उर्फ मिंटू रामदासिया (22) पुत्र मनोहरलाल निवासी चक 3-ई छोटी रामलाल कॉलोनी को गिरफ्तार किया गया है। इनके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 318 (4),61 (2) (बी) और आईटी एक्ट की धारा 66-सी के तहत एएसआई कृष्णचंद्र सिहाग द्वारा दी गई रिपोर्ट पर मुकदमा दर्ज किया गया है। इस मामले की थाना प्रभारी खुद जांच कर रहे हैं।उन्होंने बताया कि इस कॉल सेंटर की मास्टरमाइंड मूल रूप से बिहार की निवासी रेशमा खातून है। वह अपने पति का देहांत होने के बाद से श्रीगंगानगर में रह रही है।  थाना प्रभारी के मुताबिक साइबर पोर्टल पर हुई एक शिकायत के आधार पर इस कॉल सेंटर पर छापा मारा गया। गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों को आज अदालत में पेश किया जा रहा है।

पांच वर्ष में सवा करोड़ की ठगी उजागर

जांच अधिकारी सीआई पृथ्वीपालसिंह ने बताया कि रेशमा खातून और नरेश शाक्य में 2019 में जान पहचान हुई। इसके बाद दोनों ने मिलकर फेसबुक पर एक मशहूर फाइनेंस कंपनी श्रीराम फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड के नाम से मिलते जुलते श्रीराम फिंसर्व के नाम से पेज बनाया। इसके जरिए लोगों को लोन दिलाने और इंश्योरेंस करने का झांसा दिया जाने लगा। इस काम के लिए अनुराधा, अन्नू और लवप्रीत को भी नौकरी पर रख लिया गया। गगनदीप उर्फ मिंटू के बैंक खाते का ठगी की राशि के लिए इस्तेमाल किया जाता था। उसका आईडीबीआई बैंक में अकाउंट है। उन्होंने बताया कि उक्त कॉल सेंटर से जब्त किए गए रिकॉर्ड से अभी तक लगभग 1 करोड़ 25 लाख की धोखाधड़ी अनेक लोगों से किया जाना सामने आया है। अभी कुछ बैंक खातों की जांच होनी बाकी है्ठगी की राशि कहीं ज्यादा होने की संभावना है। इस कॉल सेंटर से 5 की-पैड वाले मोबाइल फोन, 8 एंड्राइड मोबाइल फोन, एचपी कंपनी का एक लैपटॉप, 3 की-बोर्ड, दो माउस, दो एलईडी, एक सीपीयू, 34 रजिस्टर एवं डायरिया बरामद हुई हैं,जिनकी अभी पड़ताल जारी है। डायरिया और रजिस्टर में विभिन्न मोबाइल नंबर खातों का विवरण कर्मचारियों की हाजिरी तथा रूपयों का लेनदेन का हिसाब लिखा हुआ है।

इस प्रकार करते थे ठगी
थाना प्रभारी सीआई पृथ्वीपालसिंह ने बताया कि यह गिरोह लोगों से छोटी-छोटी रकम की ठगी करता था। लोन मंजूर करवाने के लिए प्रोसेसिंग चार्ज के रूप में 650 से 850 रुपए तक की रकम दिए गए बैंक अकाउंट में जमा करवा लेते थे। इसी प्रकार इंश्योरेंस के लिए भी लगभग इतनी ही राशि लोगों से बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करवाते। इसके बाद ना तो कहीं से कोई लोन मंजूर करवाते और ना ही किसी कंपनी से बीमा करवाते। लोग बार-बार फोन करते तो शुरू में तो यह गिरोह उनको दिलासा देता रहता था कि उनकी फाइल प्रोसेसिंग में है। फिर बाद में कोई ना कोई कमी बताकर फाइल कैंसिल हो जाना बता देते। लिया गया प्रोसेसिंग चार्ज नॉन रिफंडेबल होना बताकर कोई राशि वापस नहीं करते थे। अभी तक की जांच में उजागर हुआ है कि इन्होंने किसी का भी ना तो लोन पास करवाया और ना ही बीमा करवाया है। छोटी रकम प्रोसेसिंग चार्ज के रूप में चले जाने के कारण कोई शिकायत नहीं करता था। इसीलिए इनका 5 वर्ष से यह गोरखधंधा चला आ रहा था। थाना प्रभारी के अनुसार पकड़े गए आरोपियों से निरंतर पूछताछ की जा रही है। इस गोरख धंधे के अभी कुछ और खुला से भी होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि अभी तक की जांच में पता चला है कि इस गिरोह द्वारा लोगों से ठगी जाने वाली राशि तीन बैंक खातों में जमा हो रही थी। जिनके नाम से यह खाते हैं, उनको भी पता था कि यह रकम किस प्रकार से लोगों को झांसा देकर ठगी जा रही है। लिहाजा यह बैंक खाताधारक भी पुलिस की जांच के दायरे में हैं।इनमें गगनदीप उर्फ मिंटू के बैंक खाते का तो पता चल गया है बाकी दो खातों की अभी पड़ताल चल रही है।

सिर्फ 650 रुपए की शिकायत से खुला मामला

थाना प्रभारी के अनुसार पिछले दिनों एक व्यक्ति ने 650 रुपए ठग लिए जाने की शिकायत साइबर पोर्टल पर कर दी। शिकायतकर्ता ने वह मोबाइल नंबर भी पोर्टल पर दर्ज किया जिससे उसे लोन मंजूर करवाने का झांसा दिया गया। साइबर पोर्टल के जरिए यह मामला जयपुर में पुलिस महानिदेशक (साइबर क्राइम एंड एससीआरबी) के पास पहुंचा।वहां से यह मामला जांच के लिए श्रीगंगानगर पुलिस अधीक्षक ऑफिस में भेजा गया। साइबर पोर्टल पर दर्ज मोबाइल नंबर की लोकेशन ट्रेस करते हुए सेतिया कॉलोनी पुलिस चौकी प्रभारी एएसआई कृष्णचंद्र सिहाग के नेतृत्व वाली टीम जब कल देर शाम को संत कृपालनगर के उक्त मकान में पहुंची तो उसका गेट बंद था। खटखटाना पर गेट नरेश शाक्य ने ही खोला। उक्त मोबाइल नंबर भी नरेश का ही था। पुलिस को देखकर नरेश मकान के अंदर भाग गया।वह सीढ़ियां चढ़कर उपरी मंजिल पर चला गया।पुलिस टीम उपरी मंजिल पर गई तो एक कमरे में कॉल सेंटर का पूरा सेटअप लगा हुआ था। ई-साक्ष्य के लिए पुलिस ने इस पूरे सेटअप की वीडियोग्राफीकी।वहीं पर रेशमा खातून सहित चारों युवतियां तथा गगनदीप भी लैपटॉप और मोबाइल फोन ऑफर उक्त ठगी का काम करते मिले। पुलिस के मुताबिक अनुराधा, अन्नू, लवप्रीत तथा गगनदीप उर्फ मिंटू को भलीभांति पता था कि  नरेश और रेशमा खातून का क्या गोरखधंधा है।

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