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फिरोजपुर फीडर की डीपीआर अटकने पर किसान नेताओं ने चिंता जाहिर की, निर्माण लागत बढ़ रही है लगातार

फिरोजपुर फीडर की डीपीआर अटकने पर किसान नेताओं ने चिंता जाहिर की, निर्माण लागत बढ़ रही है लगातार

डीपीआर की फाइल अब चंडीगढ़ में अटकी

सीडब्ल्यूसी की हरी झंडी मिलने में  डेढ-दो वर्ष और लगने की आशंका!

श्रीगंगानगर। राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले को सरसब्ज करने और पेयजल मुहैया करवाने वाली गंगनहर को पंजाब से जिस फिरोजपुर फीडर नहर से पानी मिलता है, उसके नव निर्माण की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) का मामला अटकने पर किसान नेताओं ने चिंता जाहिर की है। इस इलाके में किसानों के सबसे बड़े संगठन ग्रामीण मजदूर किसान समिति (जीकेएस) के प्रदेशाध्यक्ष रणजीत सिंह राजू, गंग नहर प्रोजेक्ट के चेयरमैन हरविंदरसिंह गिल तथा अन्य पदाधिकारियों ने आज प्रेस वार्ता कर बताया कि बड़ी उम्मीद थी कि फिरोजपुर फीडर के नवनिर्माण की डीपीआर जल्द मंजूर हो जाएगी और इसके कार्य के टेंडर भी अगले कुछ दिनों में लग जाने की आस बनी थी, लेकिन अब जानकारी मिली है कि इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में केंद्रीय जल आयोग(सीडब्ल्यूसी) लगभग डेढ वर्ष अपनी औपचारिकताएं पूरी करने में लगा देगा। प्रेस वार्ता में उपस्थित अन्य किसान नेताओं जीकेएस के जिलाध्यक्ष रामकुमार सहारण, गुरदीपसिंह गिल चक 6-ए छोटी, मंगासिंह जैड माइनर नहर अध्यक्ष, हरजिंदरसिंह मान और गुरसेवक सिंह आदि ने चिंता जताई कि जितनी देर होगी उतनी ही इस नहर के नव निर्माण की लागत बढ़ जाएगी। श्रीगंगानगर के किसान 2013 से फिरोजपुर फीडर के नवनिर्माण की मांग कर रहे हैं।करीबन 11 वर्ष बीतने के बाद भी डीपीआर मंजूर ही नहीं हो रही। डीपीआर का मामला कभी राजस्थान तो कभी पंजाब और कभी केंद्र सरकार के पास अटक जाता है। इसकी फाइल बार-बार इधर से उधर घुमाई जा रही है। फिलहाल यह मामला चंडीगढ़ में अटका हुआ है। उनको चंडीगढ़ से जानकारी मिली है कि अभी इस प्रोजेक्ट को सीडब्ल्यूसी की मंजूरी मिलने में ही डेढ से दो वर्ष लग जाएंगे। किसान नेताओं ने बताया कि पूर्व में डीपीआर बनाकर तैयार हो गई थी। तब नहर निर्माण की लागत लगभग 400 करोड रुपए आंकी की गई थी। अब इसकी लागत 600 करोड़ से भी ज्यादा होने का अनुमान है। अगर डेढ-दो वर्ष और लगे तो लागत 800 करोड़ को पार कर जाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को राजस्थान और पंजाब की सरकारों में हस्तक्षेप कर इस प्रोजेक्ट जल्द से जल्द शुरू करवाना चाहिए। प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद भी इस पर काफी समय लगेगा। पंजाब के हरिके बैराज का पानी फिरोजपुर फीडर में सरहिंद फीडर के जरिए आता है। पंजाब में इस नहर की लंबाई 0 से 168 आरडी तक है।इसकी जल वहन क्षमता 6000 क्यूसेक है। इसके नवनिर्माण की डीपीआर में जल वहन क्षमता लगभग 8000 क्यूसेक रखी जा रही है। अनेक वर्षों से फिरोजपुर फीडर की हालत बहुत ही दयनीय है। जगह-जगह से यह नहर कई बार टूट चुकी है। इसके किनारे क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।इसकी जल वहन क्षमता अब करीब चार 4000-4500 क्यूसेक रह गई है। इसी नहर से पंजाब क्षेत्र में ही गंग कैनाल (बीकानेर कैनाल)को पानी मिलता है।फिरोजपुर फीडर की हालत खराब होने के कारण गंग कैनाल को पूरा पानी नहीं मिल रहा, जिसका असर श्रीगंगानगर जिले में फसलों की सिंचाई पर ही नहीं बल्कि पेयजल पर भी पड़ रहा है। राजस्थान सीमा पर स्थित खखां हैड तक पहुंचने  पर रास्ते में 500- 600 क्यूसेक पानी का लॉसेज भी हो जाता है। किसान नेताओं ने फिरोजपुर फीडर के साथ-साथ खखां हैड से डाबला हैड तक गंग नहर की मुख्य शाखा की रिलाइनिंग और इस की  सभी वितरिकाओं के भी नवनिर्माण की आवश्यकता जताई है उन्होंने कहा कि 20 वर्ष पहले राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने लगभग 465 करोड रुपए खर्च कर गंग नहर की मुख्य शाखा का नवनिर्माण करवाया था। मुख्य नहर अब फिर से जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच गयी है। इस नहर का 1927 में बीकानेर रियासत के तत्कालीन महाराजा गंगासिंह ने निर्माण करवाया था। किसान नेताओं ने कहा कि जब 20 वर्ष पहले इस नहर को दोबारा बनाया जा रहा था, तब विशेषज्ञों ने कहा था कि इसे तोड़कर दोबारा नहीं बनाया जाए क्योंकि 1927 में जितनी मजबूती से यह नहर बनाई गई थी, उतनी मजबूती से अब नहीं बन पाएगी। विशेषज्ञों की सलाह को दरकिनार कर दिया गया। दोबारा बनाई गई नहर 20 वर्ष भी नहीं चल पाई।

आईजीएनपी, सरहिंद फीडर और भाखड़ा पर भी हो काम

प्रेस वार्ता में किसान नेताओं ने गंग नहर के साथ-साथ इंदिरा गांधी नहर परियोजना(आईजीएनपी), सरहिंद फीडर और भाखड़ा नहर परियोजनाओं की हालत का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पंजाब में हरिके बैराज पर 0 से 20 आरडी तक आईजीएनपी नहर कच्ची है‌इसमें सिल्ट और मलबा जम जाता है।इस कारण 1500 से 2000 क्यूसेक पानी कम मिलता है। लिहाजा नहर के इस हिस्से को पक्का करवाया जाए। भाखड़ा नहर परियोजना में 1250 क्यूसेक पानी कम से कम दिए जाने की मांग उन्होंने फिर से दोहराई।पंजाब क्षेत्र में सरहिंद नहर के बकाया रहे 16 किमी री-लाइनिंग कार्य को जल्द पूरा करवाने की भी उन्होंने मांग की। किसान नेता गुरदीपसिंह गिल ने कहा कि पंजाब से गंग कैनाल में पानी का बार-बार उतार चढ़ाव होने को देखते हुए वैकल्पिक रूप से बनाई गई लिंक चैनल नहर को पक्का कर इसमें पानी का पॉन्ड लेवल मेंटेन किया जाए।

केंद्र सरकार का दोहरा मापदंड
जीकेएस के जिलाध्यक्ष रामकुमार सहारण ने कहा कि केंद्र सरकार वर्ष में दो बार फसलों की एमएसपी बढ़ाकर वाहवाही लूट लेती है, लेकिन एमएसपी पर फसलों की खरीद नहीं करती। सरकार एमएसपी पर फसलों की खरीद धीरे-धीरे काम करती जा रही है। यह सरकार का दोहरा मापदंड है।राजस्थान में एमएसपी पर फसलों की खरीद के लिए जन आधार कार्ड को अनिवार्य किया गया है,जिसमें पूरे परिवार को एक इकाई माना जाता है। इस कारण एक किसान की सारी फसल एमएसपी पर नहीं बिकती। एमएसपी खरीद की शर्तें धीरे-धीरे सरकार बढ़ती जा रही है ताकि खरीद करनी ही नहीं पड़े। उन्होंने कहा कि एमएसपी पर फसल की खरीद आधार कार्ड से होनी चाहिए।

फिर से बड़े आंदोलन की जरूरत
किसान नेताओं ने कहा कि गंग कैनाल, आईजीएनपी,सरहिंद फीडर और भाखड़ा नहरों की दिनोंदिन होती दयनीय हालत से श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में फसलों का उत्पादन बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। इसका सीधा असर किसानों पर ही नहीं बल्कि व्यापारियों, मजदूरों, छोटे दुकानदारों और आम व्यक्तियों पर भी पड़ रहा है। यह मामला सिर्फ किसानों का नहीं है बल्कि सभी वर्गों के लोगों का है। उन्होंने कहा कि उक्त सभी समस्याओं के शीघ्र समाधान के लिए फिर से इस इलाके में एक बड़े आंदोलन को शुरू करने की आवश्यकता है। आंदोलन से ही सरकार पर दबाव बनेगा। किसान नेताओं ने कहा कि जल्दी ही पूरे इलाके में गांव-गांव जाकर किसानों को जागृत करने के अभियान की रूपरेखा बनाई जा रही है। किसानों सहित आम वर्गों के लोग बड़े आंदोलन के लिए खुद को मानसिक रूप से तैयार रखें।

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