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भगतसिंह मेमोरियल फाउंडेशन ने दुल्ला भट्टी की कब्र के पास अतिक्रमणों पर की चिंता व्यक्त

भगतसिंह मेमोरियल फाउंडेशन ने दुल्ला भट्टी की कब्र के पास अतिक्रमणों पर की चिंता व्यक्त
श्रीगंगानगर।
लाहौर(पाकिस्तान)में भगतसिंह मेमोरियल फाउंडेशन लोहड़ी के त्योहार से जुड़े वीर आइकन दुल्ला भट्टी की कब्र पर गए और इसकी खराब स्थिति व आसपास के क्षेत्र में अतिक्रमण पर चिंता व्यक्त की। पंजाब के निकटवर्ती शहर अबोहर मूल के फाउंडेशन के अध्यक्ष इम्तियाज रशीद कुरैशी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मलिक एहतिशामुल हसन और अतिरिक्त सचिव डॉ. शाहिद नसीर उन लोगों में शामिल थे, जो मियानी साहिब कब्रिस्तान में कब्र पर गए और भट्टी के लिये प्रार्थना की।कुरैशी ने कहा कि दुल्ला भट्टी आत्मसम्मान के रक्षक थे। उन्होंने सम्राटों को चुनौती दी। भट्टी अभी भी इतिहास में जीवित हैं। उनकी याद पूरी दुनिया में मनाये जाने वाले लोहड़ी के त्योहार पर ताजा हो जाती है।
उन्होंने कहा कि लोहड़ी से जुड़ी लोककथाओं में से एक दुल्ला भट्टी की कथा है। किंवदंती के अनुसार, दुल्ला भट्टी- (राय अब्दुल्ला खान भट्टी) -रावी और चिनाब नदियों के बीच पंजाब के क्षेत्र में गरीबों के प्रति अपने रॉबिन हुड जैसे दयालु कृत्यों के कारण नायक बन गए। दुल्ला भट्टी से जुड़ी कहानियों में से एक कहानी सुंदरी की घटना का वर्णन करती है।एक हिंदू लड़की जिसका सैनिकों ने गुलाम के रूप में काम करने के लिए अपहरण कर लिया था।दुल्ला भट्टी ने उस लड़की को बचाया और अपने खर्च पर उसकी शादी करवाई। समय के साथ अलाव के आसपास के विवाह समारोहों ने लोहड़ी को जन्म दिया। लोकप्रिय लोहडी गीत ‘सुंदर मुंदरिये हो, तेरा कौन विचारा हो। दुल्ला भट्टी वाला हो’ इस कहानी को उजागर करता है। दुल्ला भट्टी को अंतत: 1599 में लाहौर में फांसी दी गई, लेकिन उनके साहसी कारनामों की किंवदंतियां लोककथाओं और इस तरह के लोहडी गीतों के माध्यम से जीवित हैं।कुरैशी ने कहा कि लाहौर के सबसे पुराने कब्रिस्तान में उनकी कब्र के आसपास प्रशासन ने पंजाब सरकार द्वारा उनकी कब्र के लिए आरक्षित साढ़े तीन मरला स्थल पर अवैध कब्रों का निर्माण न रोककर भट्टी की कब्र की सुंदरता को नष्ट कर दिया है। नशेडियों ने इस ऐतिहासिक कब्रिस्तान में एक स्थायी शिविर स्थापित किया हुआ है। उन्होंने कहा, हम सरकार से मांग करते हैं कि दुल्ला भट्टी का एक सुंदर मकबरा विकसित किया जाए। उनके जीवन इतिहास को शिक्षा पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए, एक स्मारक डाक टिकट और सिक्के जारी किए जाने चाहिए और महान योद्धा को नायक का दर्जा दिया जाना चाहिए। 

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