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बहुचर्चित बेअदबी प्रकरण में प्रसंज्ञान के विरुद्ध हैप्पी बाबा की रिवीजन रिट को अदालत ने खारिज किया 

बहुचर्चित बेअदबी प्रकरण में प्रसंज्ञान के विरुद्ध हैप्पी बाबा की रिवीजन रिट को अदालत ने खारिज किया 

  • 10 वर्ष पुराने मामले में आया नया मोड़ 

श्रीगंगानगर। श्रीगंगानगर जिले के चूनावढ थाना क्षेत्र के चक 11-जी छोटी (हर्निया) में एक विवादित धर्मस्थल में श्री गुरु ग्रंथ साहिब सही तो कुछ धार्मिक वस्तुओं के गायब होने और इसमें आगजनी होने के बहुचर्चित मामले में अदालत द्वारा लिए गए प्रसंज्ञान के विरुद्ध आरोपी गुरुसाहबसिंह उर्फ हैप्पी की ओर से दायर की गई रिवीजन रिट (पुनर्रीक्षण याचिका) को खारिज कर दिया गया है। इससे 10 वर्ष पुराने मामले में नया मोड़ आ गया है। रिवीजन रिट खारिज होने से बाबा हैप्पी के विरुद्ध पूर्व में निचली अदालत द्वारा लिए गए प्रसंज्ञान के तहत अब आगे सुनवाई जारी रहेगी। रिवीजन रिट खारिज होने से बाबा हैप्पी को तगड़ा झटका लगा है। उनकी कानूनी मुश्किलें बढ़ गईं। प्रकरण के अनुसार 19-20 अगस्त 2014 की रात को चक 11 की छोटी (हर्निया) में एक विवादित धर्मस्थल से कुछ शरारती तत्वों ने श्री गुरुग्रंथ साहब के पावन स्वरूप सहित कुछ धार्मिक वस्तुओं को गायब कर दिया जबकि धर्मस्थल में आग भी लगा दी गई। आगजनी से धर्मस्थल को काफी नुकसान पहुंचा। इस घटना को लेकर इलाके सिख संगत में आक्रोश उफान पर आ गया था। एक सिख जत्थेबंदी के वरिष्ठ पदाधिकारी जीतसिंह लखियां द्वारा दी गई रिपोर्ट के आधार पर 21 अगस्त को अनेक लोगों के खिलाफ चूनावढ थाना में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने सहित विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। गुरु साहबसिंह उर्फ हैप्पी बाबा पर इस घटना से पूर्व में ही आरोप लग रहे थे कि वह एक खेत धर्मस्थल बनाकर उसमें एक तरफ गुरु ग्रंथ साहब का पावन स्वरूप रखे हुए हैं, वहीं पास में ही वह आने वाले श्रद्धालुओं को धागा ताबीज और टोना टोटका करके देता हैं। इस धर्मस्थल में उसने नीचे बेसमेंट में मढ़ी (समाधि) बना रखी है। यह सब सिख मर्यादाओं के विपरीत है। इसे लेकर बाबा हैप्पी और सिख मर्यादाओं का पालन करने वाली सिख जत्थेबंदियों के पदाधिकारी में पहले से ही खींचतान तथा आरोप प्रत्यारोप चल रहे थे। इसी बीच 19-20 अगस्त 2014 की रात को इसी स्थल से न केवल श्री गुरु ग्रंथ साहब का पावन स्वरूप गायब हो गया बल्कि कुछ अन्य धार्मिक वस्तुएं भी नदारत हो गईं। वहीं इस धर्मस्थल में आग भी लग गई, जिससे काफी नुकसान हुआ।

तीन वर्ष बाद पुलिस ने लगाई एफआर

 उपरोक्त घटनाक्रम के संबंध में दर्ज हुए मुकदमे की पुलिस द्वारा 3 वर्ष तक जांच पड़ताल की गई। जून 2017 में पुलिसने अदालत ने अंतिम प्रतिवेदन (एफआर) अदालत में पेश करदी। इसके विरुद्ध परिवादी की ओर से नवंबर 2017 में नाराजगी याचिका प्रस्तुत की गई। इसमें पुलिस की एफआर को चैलेंज किया गया था। परिवादी की नाराजगी याचिका पर भी 6 वर्ष तक अदालत में सुनवाई चलती रही। विगत 22 फरवरी 2023 को अदालत ने पुलिस की एफआर को अस्वीकार करते हुए आरोपी गुरु साहबसिंह उर्फ हैप्पी बाबा के विरुद्ध धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की धारा 295 के तहत प्रथम दृष्टिया आप सही माने और प्रसंज्ञान लेते हुए उसे जमानती वारंट से तलब करने के आदेश दिए। गुरुसाहब सिंह उर्फ हैप्पी ने अदालत के इस आदेश के विरुद्ध जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में 28 अप्रैल 2023 को रिवीजन रिट दायर कर दी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत से रिवीजन रिट को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (संख्या 01) को अंतरित कर दिया गया। इस पर भी लगभग डेढ़ वर्ष तक अदालत में सुनवाई चलती रही। पिछले दिनों अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (संख्या-01) डॉ.महेंद्रसिंह सोलंकी ने गुरुसाहबसिंह उर्फ हैप्पी बाबा की रिवीजन रिट को स्वीकार योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया। विद्वान न्यायाधीश ने पूर्व में 22 फरवरी 2023 को बाबा हैप्पी के विरुद्ध लिए गए प्रसंज्ञान के आदेश की पुष्टि की है। परिवादी जीतसिंह लखियां के अधिवक्ता रमनदीपसिंह चतर्थ ने बताया कि अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (संख्या 01) की अदालत द्वारा आदेश उक्त आदेश पारित करने के बाद बाबा हैप्पी के विरुद्ध पूर्व में निचली अदालत में चल रहा प्रकरण अब आगे बढ़ेगा। रिवीजन रिट दायर किए जाने से पूर्व निचली अदालत ने प्रसंज्ञान लेने के बाद गवाही देने के लिए गवाहों को तलब करना शुरू कर दिया था। 

संगत में आकर मांगी थी लिखित में माफी 

चक 11 की छोटी (हर्निया) के विवादित धर्मस्थल से श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूप के गायब होने तथा वहां आगजनी होने की घटना के संबंध में मुकदमा दर्ज होने पर जब सिख संगत का आक्रोश उफान पर था, उसी दौरान मुख्य आरोपी गुरुसाहबसिंह उर्फ हैप्पी बाबा ने स्थानीय पदमपुर मार्ग पर स्थित धन-धन शहीद बाबा दीप सिंह गुरुद्वारा में उपस्थित होकर अपने कृत्यों के लिए लिखित तौर पर श्री अकाल तख्त साहिब से माफी मांगी। माफीनामा में लिखा कि वह मढी के ऊपर गुरु ग्रंथ साहब का प्रकाश करके लोगों को धागे ताबीज देता था और पाखंड करता था। श्री अकाल तख्त साहिब मुझे इस पाप की माफी बख्शे।मैं आगे से मढी के ऊपर गुरु ग्रंथ साहब का प्रकाश नहीं करूंगा और ना ही वहां पर गुरुद्वारा बनाऊंगा। इस माफीनामा के बावजूद पुलिस ने एफआर लगा दी थी। इसी माफीनामा सहित अन्य तथ्यों के आधार पर अब अदालत ने बाबा हैप्पी की रिवीजन रिट को खारिज कर दिया, जिस कारण अब उनकी कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं। हालांकि उनके पास रिवीजन रेट खारिज होने के आदेश के विरुद्ध हाईकोर्ट में याचिका दायर करने का विकल्प है। उल्लेखनीय है की घटना के कुछ दिनों बाद श्री गुरु ग्रंथ साहब का पावन स्वरूप मिल गया था।

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