प्रदेश सरकार ने नए कोर्ट कांप्लेक्स का आधे से भी ज्यादा बजट अटकाया, एडवोकेट चैंबर्स का निर्माण नहीं
– अधिवक्ताओं में फैलने लगा आक्रोश
श्रीगंगानगर। प्रदेश की भाजपा सरकार ने श्रीगंगानगर में पुरानी शुगर मिल वाली जगह पर निर्माणाधीन नए कोर्ट कांप्लेक्स के लिए पूर्व में प्रस्तावित बजट राशि में से आधे से भी ज्यादा बजट अटका दिया है। इस कारण नए कांप्लेक्स में एडवोकेट चैंबर्स का निर्माण अभी तक शुरू नहीं हुआ है। इसी परिसर में जुडिशरी रेजिडेंसी का निर्माण भी होना है। यह निर्माण कार्य भी बजट न मिलने के कारण अटकने की संभावना है। बिना एडवोकेट चैंबर निर्माण के नए कोर्ट कांप्लेक्स को शुरू करने का अधिवक्ताओं को कोई औचित्य नजर नहीं आ रहा। इस कारण उनमें आक्रोश फैलने लगा है। जोधपुर हाईकोर्ट के जस्टिस मनोज गर्ग ने श्रीगंगानगर में दो दिन के प्रवास के दौरान कल मंगलवार को नए कोर्ट कांप्लेक्स के निर्माण का जायजा लिया। उनके साथ अनेक न्यायिक अधिकारी और बार संघ के अध्यक्ष जसवंत भादू, पूर्व अध्यक्ष सीताराम बिश्नोई और वरिष्ठ अधिवक्ता ओम रावल आदि भी रहे। इस दौरान भी एडवोकेट चैंबर्स का निर्माण नहीं होने का मुद्दा उठा। अधिवक्ताओं ने जस्टिस मनोज गर्ग को अवगत भी करवाया कि एडवोकेट चैंबर्स का निर्माण हुए बिना नए कोर्ट कांप्लेक्स को शुरू कर करने से उनके सामने अनेक प्रकार की मुश्किलें उत्पन्न हो जाएंगी। नए कांप्लेक्स में अधिवक्ता अपना काम कैसे कर पाएंगे? जब उनके लिए बैठने की समुचित और पर्याप्त जगह ही नहीं होगी। निरीक्षण के दौरान जस्टिस मनोज गर्ग ने परिसर के निर्माण की एजेंसी के नोडल अधिकारी से निर्माण कार्य के बारे में चर्चा की। जानकारी के अनुसार उन्होंने निर्देश दिए हैं कि आगामी जून माह के अंतिम सप्ताह तक प्रथम चरण का निर्माण पूर्ण कर लिया जाए ताकि जुलाई में इस कांप्लेक्स का लोकार्पण हो सके। उनके द्वारा जुलाई में नए परिसर का लोकार्पण किया जाने की इच्छा ही जाहिर नहीं की गई बल्कि इसके निर्देश भी दिए। मगर नए कांप्लेक्स में बाकी निर्माण करें कैसे पूरे होंगे, इस पर एक बड़ा सवालिया निशान लग गया है क्योंकि राज्य सरकार की ओर से पूर्व में निर्धारित बजट राशि का आवंटन ही नहीं किया जा रहा। बार अध्यक्ष जसवंत भादू ने बताया कि परिसर का निर्माण बड़ी तेजी से और गुणवत्तापूर्ण हो रहा है। अगर इसी रफ्तार से कार्य चलता रहा तो जुलाई में लोकार्पण हो जाएगा। मगर बजट के अभाव में परिसर का पूरा निर्माण नहीं हो पाएगा। सात मंजिला भवन बन रहा है लेकिन जुलाई तक दो या तीन फ्लोर पूर्ण होने की संभावना है। दो-तीन फ्लोर पूर्ण निर्मित हो जाते हैं तो अदालतों को इसमें शिफ्ट कर दिया जाएगा। शेष बिल्डिंग का निर्माण कार्य बाद में पूरा होता रहेगा।श्रीगंगानगर में अदालतों की कुल संख्या 39 है।
42 करोड़ मिले, 10 करोड़ और मिलेंगे
बार के पूर्व अध्यक्ष सीताराम बिश्नोई ने बताया कि नए कांप्लेक्स के लिए राज्य सरकार ने 111 करोड़ से अधिक की राशि मंजूर की थी। अभी तक 42 करोड रुपए सरकार ने दिए हैं। अगले कुछ दिनों में लगभग 10 करोड रुपए और मिलने की संभावना है। इस प्रकार सरकार लगभग 52 करोड़ रुपए ही देने जा रही है। बाकी राशि कब मिलेगी कुछ पता नहीं है। उन्होंने बताया कि 16-17 करोड़ की लागत से एडवोकेट चैंबर्स का निर्माण इस कांप्लेक्स में प्रस्तावित है जो कि अभी तक शुरू नहीं हुआ है। कायदे से चैंबर्स का निर्माण भी मुख्य बिल्डिंग के साथ ही शुरू हो जाना चाहिए था ताकि कांपलेक्स जब शुरू हो तो अधिवक्ताओं के बैठने के लिए भी समुचित स्थान उपलब्ध हो। अगर चैंबर नहीं बनेंगे तो अधिवक्ता वहां काम कैसे करेंगे। उन्होंने बताया कि इस परिसर में ज्यूडिशरी रेजिडेंसी, एडवोकेट चैंबर्स,पार्किंग, लाइब्रेरी, कैंटीन और आउट एरिया आदि का भी निर्माण होना है। उन्होंने बताया कि पूर्व में जहां एडवोकेट चैंबर्स बनने थे, अब उसकी जगह भी नक्शे में बदल दी गई है।चैंबर्स कोर्ट की मेन बिल्डिंग से दूर कर दिए गए हैं।यह भी सही नहीं है। अनेक अधिवक्ताओं ने आज इस संबंध में की गई बातचीत में राज्य सरकार द्वारा बजट रोकने और एडवोकेट चैंबर्स के निर्माण की जगह बदलने पर आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने सही कदम नहीं उठाया तो अधिवक्ता आंदोलनात्मक कदम उठाएंगे।यह जानकारी भी सामने आ रही है कि कोर्ट परिसर की मेन बिल्डिंग पूरी तरह से वातानुकूलित बनाई जाएगी। सरकार से बाकी बजट नहीं मिलने की वजह से बाकी सभी काम लटक जाएंगे। बकाया बजट जल्द रिलीज करवाने के लिए बार संघ द्वारा स्थानीय भाजपा विधायक जयदीप बिहानी से अप्रोच की जा रही है।
जमीन बिके तो बजट मिलेगा!
नए कोर्ट कांप्लेक्स का शिलान्यास पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के शासनकाल में अक्टूबर 2022 में हुआ था।शिलान्यास जस्टिस मनोज गर्ग तथा अन्य न्यायिक अधिकारियों ने आयोजित भव्य समारोह में किया था। सरकार ने 111 करोड रुपए मंजूर किए थे। बाद में निर्माण लागत में कुछ वृद्धि हो जाने के मध्य नजर इसकी लागत करीब 125 करोड रुपए आंकी गई थी। शिलान्यास होने के बाद से निर्माण कार्य निर्बाध रूप से चल रहा है, लेकिन और बजट नहीं मिलने के कारण दो या तीन फ्लोर बनने के बाद आगे का काम रुक जाने के आसार बन गए हैं। अन्य सूत्रों ने बताया कि राज्य सरकार चाहती है कि बकाया राशि का इंतजाम पुरानी शुगर मिल वाली जगह का कुछ हिस्सा बेचने से प्राप्त होने वाली आय से किया जाए। उल्लेखनीय है कि इस जगह का कुछ हिस्सा सरकार ने व्यावसायिक श्रेणी में डाला हुआ है श।जिला प्रशासन इस जमीन को बेचने के पूर्व में कई बार प्रयास कर चुका है लेकिन जमीन की कीमतें बहुत ज्यादा निर्धारित करने के कारण बिक नहीं रही। इसी कारण इसी जगह पर प्रस्तावित मिनी सचिवालय का निर्माण भी शुरू नहीं हो पा रह। राज्य सरकार ने मिनी सचिवालय के लिए भी अभी तक बजट प्रावधान नहीं किया है।
