मजदूर का बैंक खाता खुलवाकर साइबर फ्रॉड करने वालों को दिया, तीन करोड़ रुपए जमा हुए-तुरंत निकाल लिए
– आरोपी ने अपना बैंक खाता भी ठगी करने वालों को दिया
– उसमें भी एक करोड़ की राशि जमा हुई
– फिजियोथैरेपिस्ट सहित दो के खिलाफ मामला दर्ज
श्रीगंगानगर। जलदाय विभाग में नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक गरीब मजदूर से एक फिजियोथेरेपिस्ट ने आईडी प्रूफ के कागजात ले लिए। उससे बैंक में करंट अकाउंट खुलवाया और अकाउंट का नंबर साइबर फ्रॉड करने वालों को दे दिया। इस अकाउंट में कुछ ही दिनों में लगभग 3 करोड रुपए ऑनलाइन ट्रांजैक्शन से जमा हुए, जिनको साथ के साथ निकाल लिया गया। फिजियोथैरेपिस्ट ने अपना बैंक अकाउंट भी साइबर फ्रॉड करने वालों को दे रखा था। उसमें भी महज 10 दिनों में करीब 1 करोड रुपए जमा हुए। यह राशि भी तुरंत निकल गई। साइबर फ्रॉड का यह मामला गरीब मजदूर द्वारा पुलिस अधीक्षक को विगत 9 दिसंबर को की गई शिकायत पर हुई जांच पड़ताल में सामने आया है। पुरानी आबादी पुलिस के अनुसार मजदूर रमेश भाट निवासी चक 3-जी(छोटी) की ओर से अब पुरानी आबादी में सुखवंत पैलेस के पास फिजियोथैरेपी का काम करने वाले रविंदर उर्फ वीरेंद्र(पुत्र मिश्रीलाल) तथा जवाहरनगर निवासी रोहित गोयल के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। जानकारी के अनुसार रोहित गोयल को पिछले दिनों कोटा पुलिस पकड़ ले गई थी, जबकि रवींद्र उर्फ वीरेंद्र से गुड़गांव पुलिस पूछताछ करने के लिए श्रीगंगानगर आई थी। पुलिस के मुताबिक मजदूरी करने वाला रमेश पिछले वर्ष में महीने में कमर में दर्द होने के कारण रविंद्र उर्फ वीरेंद्र के पास फिजियोथैरेपी लेने के लिए गया था। इसी दौरान रविंद्र के पूछने पर रमेश ने बताया कि वह दिहाड़ी मजदूरी करता है। रविंद्र ने कहा कि जलदाय विभाग में उसकी अच्छी जान पहचान है।वह उसमें नौकरी लगवा देगा। यह झांसा देकर उसने रमेश से उसके आईडी प्रूफ आदि कागजात ले लिए। फिर बताया कि विभाग में नौकरी के लिए उसे करंट अकाउंट खुलवाना होगा। उसका वेतन करंट अकाउंट में ही आएगा।पुरानी आबादी में श्रीकरनपुर रोड पर एक बैंक शाखा में ले जाकर रमेश का उसने करंट अकाउंट खुलवाया, जिसमें 5 हजार रुपए जमा करवाए गए। बैंक अकाउंट खुलवाते हुए रमेश को भनक लगने दिए बिना वीरेंद्र ने अपना मोबाइल नंबर लिंक करवा लिया। बैंक से मिली पासबुक चेक बुक एटीएम आदि की किट भी उसने अपने पास रख ली। रमेश ने पुलिस को बताया कि इसके बाद वह कई दिन तक अपनी नौकरी के बारे में पूछता रहा लेकिन रविंद्र आजकल-आजकल कहकर टालता रहा। विगत नवंबर महीने में उसे पुणे (महाराष्ट्र) पुलिस का नोटिस मिला तो पता चला कि उसके नाम से खोले गए करंट अकाउंट में करोड़ों रुपए जमा हुए हैं। वह बैंक शाखा में गया तो बताया गया कि उसके अकाउंट मई में से अक्टूबर के दौरान कुल मिलाकर 2 करोड़ 82 लाख से अधिक की राशि देश के विभिन्न हिस्सों से जमा हुई, जिसे साथ की साथ निकाल लिया गया। रमेश के अनुसार रविंद्र द्वारा अकाउंट खुलवाने के बाद उसने उसमें कोई लेनदेन नहीं किया था।
पहले पुलिस ने नहीं की सुनवाई
रमेश ने इस मामले की शिकायत तुरंत पहले सदर थाना में और फिर साइबर थाना में की लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। फिर 9 दिसंबर को पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र दिया तो उसे पर जांच के आदेश दिए गए। पुरानी आबादी थाना में हवलदार कमलेश कुमार ने जांच की तो उजागर हुआ कि रविंद्र उर्फ वीरेंद्र के बैंक अकाउंट में भी अप्रैल 2024 में सिर्फ 10 दिनों में 98 लाख से अधिक की राशि जमा हुई थी। इस राशि को भी जमा होते ही निकाल लिया गया। रविंदर का बैंक अकाउंट भी साइबर फ्रॉड की राशि जमा होने के कारण फ्रीज है। रमेश भाट के अकाउंट को भी महाराष्ट्र पुलिस ने फ्रीज करवा रखा है। इन दोनों के खातों में कोई रकम नहीं है। पुलिस ने जांच में पाया कि रविंद्र ने रमेश का बैंक अकाउंट जवाहरनगर निवासी किसी रोहित गोयल को दे दिया था। कल शाम को दर्ज किए गए साइबर फ्रॉड के इस मामले की जांच कर रहे हवलदार कमलेश ने बताया कि वीरेंद्र को अपने तथा रमेश के अकाउंट में आने वाली प्रत्येक ट्रांजैक्शन राशि में से 10 से 15 हजार रुपए का कमीशन मिलता था। कुछ दिन पहले कोटा पुलिस ऐसे ही साइबर फ्रॉड के एक मामले में रोहित गोयल को ले गई थी। हरियाणा की गुड़गांव पुलिस भी कुछ दिन पहले फिजियोथैरेपिस्ट वीरेंद्र से उसके अकाउंट में जमा हुई। साइबर फ्रॉड की रकम के बारे में पूछताछ करने के लिए आई थी। फिलहाल इस मामले में अभी किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
