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किसी और को मालिक बनाकर रिटायर्ड फौजी की एक मुरब्बा कृषि भूमि हड़पने के आरोप में चार गिरफ्तार

किसी और को मालिक बनाकर रिटायर्ड फौजी की एक मुरब्बा कृषि भूमि हड़पने के आरोप में चार गिरफ्तार
– भूमिज्ञका फर्जी मलिक बनने वाला भी पकड़ा गया
– मामले में दंपती, सरपंच, राजस्व पटवारी, उप रजिस्ट्रार और ई मित्र कर्मी सहित अनेक लोग हैं नामजद
श्रीगंगानगर।
किसी और को मलिक बनाकर एक रिटायर्ड फौजी की लगभग एक मुरब्बा कृषि भूमि हड़पने के लगभग एक वर्ष पुराने प्रकरण में पुलिस ने चार व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है।इनमें जमीन का फर्जी मालिक बना शख्स भी शामिल है। यह मामला मुकलावा थाना में 20 फरवरी को मनप्रीतसिंह रायसिख (44) निवासी पटेलनगर, सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) द्वारा दी गई रिपोर्ट के आधार पर सुभाषचंद्र जाट, उसकी पत्नी सुनीता निवासी चक 7- जैड, डाकघर 11 जैड तहसील रायसिंहनगर,राजेंद्रसिंह मजहबी सिख निवासी पारसरामनगर बठिंडा (पंजाब),जसप्रीतसिंह जटसिख निवासी गली नंबर 4 जंभेश्वर कॉलोनी वार्ड नंबर 7 चक 7-जैड, अभिषेक बिश्नोई राजस्व पटवारी चक 12-एनआरडी(ए), अंकित मिमानी नायब तहसीलदार उप रजिस्टार मुकलावा, बलबीर सिंह सरपंच ग्राम पंचायत चक 12 एनआरडी(ए) और जनक कर्मचारी ई-मित्र केंद्र सहित अनेक व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज हुआ था। मुकलावा थाना प्रभारी सब इंस्पेक्टर संपतराम ने बताया कि गुरनामसिंह राजपूत (45) पुत्र उत्तमसिंह निवासी रामनगर बठिंडा (पंजाब),सुखदीपसिंह मजहबी सिख (35) पुत्र मेजरसिंह निवासी भगवानगढ़,बलविंदर शर्मा (46) पुत्र मिट्ठूराम शर्मा निवासी चक 35-एमएल और जसकरणसिंह उर्फ काला मजहबी सिख (31) पुत्र रेशमसिंह निवासी चक 12-एनआरडी को गिरफ्तार किया गया है।उन्होंने बताया कि गुरुनामसिंह ही परिवादी मनप्रीतसिंह का पिता नारायणसिंह बना था। उसे जमीन का मालिक बनाकर पेश किया गया था। उन्होंने बताया कि बाकी आरोपियों की अभी जांच पड़ताल चल रही है। मुकदमे की जांच आगे बढ़ाने के साथ जो लोग दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ भी कानून सम्मत कार्यवाही की जाएगी। परिवादी मनप्रीतसिंह के पिता नारायणसिंह भारतीय सेनख से सेवानिवृत हैं। करीब 78 वर्षीय नारायणसिंह फिलहाल पटेलनगर, सहारनपुर उत्तर प्रदेश में रहते हैं। उनकी रायसिंहनगर तहसील क्षेत्र के चक 12 एनआरडी(ए) में लगभग एक मुरब्बा कृषि भूमि है। जिसकी कीमत लाखों करोड़ों की में है। मनप्रीतसिंह ने मुकदमा दर्ज करवाते हुए बताया था कि सरपंच बलबीरसिंह और राजस्व पटवारी अभिषेक बिश्नोई को अच्छी तरह पता था कि चक 12 एनआरडी(ए)में उसके पिता नारायणसिंह के नाम से जमीन है। ई मित्र का कर्मचारी जनक भी उसके पिता को अच्छी तरह से जानता था। उसे 25 जनवरी 2024 को पता चला कि उसके पिता नारायणसिंह के स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति को नारायणसिंह बनाकर सुभाषचंद्र पुत्र हरिसिंह ने जमीन को बेच दिया है। जमीन के बैयनामा पर उसके पिता की फोटो नहीं है। और ना ही उम्र सही लिखी है। बैयनामा पर किसी और व्यक्ति की फोटो लगी हुई थी। बैयनामा सुभाषचंद्र के पक्ष में ही किया गया था, जिसमें राजेंद्रसिंह पुत्र गुरुचरण सिंह मजहबी सिख निवासी परसरामनगर बठिंडा और जसप्रीतसिंह पुत्र राजविंदरसिंह निवासी जंभेश्वर कॉलोनी वार्ड नंबर 7, चक 7-जैड गवाह बने। उक्त बैयनामा 25 जनवरी 2024 को उसके पिता के नाम से सुभाषचंद्र के पक्ष में करवाया गया। उप-पंजीयक मुकलावा से बैयनामा रजिस्टर्ड करवाया गया। राजस्व पटवारी अभिषेक बिश्नोई और सरपंच बलबीरसिंह पर परिवादी मनप्रीतसिंह ने मिलीभगत कर इंतकाल सुभाष चंद्र के नाम करवा देने का आरोप भी लगाया है। 

केसीसी लोन लेने का प्रयास

भूमि का इंतकाल दर्ज होने के पश्चात सुभाषचंद्र ने इस जमीन पर यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया की श्रीगंगानगर की शाखा से किसान क्रेडिट स्कीम (केसीसी ) का लोन लेने की कोशिश भी की। परिवादी मनप्रीतसिंह के अनुसार उसे जैसे ही उसके पिता के नाम की जमीन पर फर्जी मालिक सुभाषचंद्र जाट द्वारा केसीसी का लोन उठाने का पता चला तो उसने तुरंत बैंक शाखा प्रबंधक को सूचना देकर लोन प्रोसेसिंग की कार्यवाही को रुकवा दिया। उसने इस सारे मामले में मुकलावा उप-पंजीयक ऑफिस में उप रजिस्टार एवं रजिस्ट्री अधिकारी अंकित मिमानी की भी मिलीभगत होने का आरोप लगाया है। उसके पिता के नाम का फर्जी आधार कार्ड, फर्जी पैन कार्ड और अन्य फर्जी दस्तावेज उक्त आरोपियों द्वारा जमीन का फर्जी मालिक बनाकर रजिस्ट्री अधिकारी के समक्ष पेश करने का भी आरोप लगाया। जांच अधिकारी थाना प्रभारी सब इंस्पेक्टर संपतराम ने बताया कि इस पूरे मामले में जमीन हड़पने वाला एक पूरा गिरोह है। उक्त आरोपियों में से कुछ लोग इसी गिरोह से जुड़े हुए हैं। उक्त चार व्यक्तियों को गिरफ्तारी करने के बाद अब पुलिस इस पूरे गिरोह की कार्यप्रणाली  और इसमें शामिल अन्य व्यक्तियों के बारे में पता लग रही है।

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