सहकारी बैंक का कर्ज चुकाये बिना रहन जमीन बेच दी
– सहकारिता विभाग ने रजिस्ट्री शून्य घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की
श्रीगंगानगर। सहकारी बैंक का कर्ज चुकाये बिना कृषि भूमि का बेचान करने के एक और मामले में सहकारिता विभाग ने सहकारी अधिनियम अंतर्गत कार्यवाही करते हुए कृषि भूमि की रजिस्ट्री शून्य घोषित करने की प्रक्रिया आरम्भ कर दी है। ताजा मामला हनुमानगढ़ जिले का है। ऐसा ही एक मामला, पहले श्रीगंगानगर जिले में हुआ था, जिसमें पहली बार, किसी व्यक्ति को कृषि भूमि की रजिस्ट्री शून्य घोषित कर दी गयी थी। इस प्रकरण में बैंक को कर्ज की सम्पूर्ण राशि प्राप्त हो गयी थी, हालांकि, खरीदार के पक्ष में रजिस्ट्री अभी तक बहाल नहीं हुई है। खंडीय अतिरिक्त रजिस्ट्रार, बीकानेर, राजेश टाक की ओर से कुछ दिन पूर्व ही हनुमानगढ़ केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड की नोहर शाखा के ऋणी श्रीमती चावली उर्फ चंद्रावली पत्नी दुलाराम स्वामी, सहखातेदार सतवीर पुत्र दुलीचंद स्वामी, रेणुबाल पत्नी परमजीत स्वामी और कृषि भूमि का खरीदार (सभी परलीका निवासी) को राजस्थान सहकारी सोसाइटी अधिनियम की धारा 39(ग) के अंतर्गत, बैंक के पक्ष में रहन रखी कृषि भूमि की रजिस्ट्री शून्य घोषित करने के लिए नोटिस जारी किया गया है। बैंंक द्वारा 2 दिसम्बर 2024 को जब यह प्रकरण खंडीय अतिरिक्त रजिस्ट्रार कार्यालय को भिजवाया गया था, तब ऋणी चावली उर्फ चंद्रावली और सहखातेदार, उसके पुत्र सतवीर की ओर 59 लाख 80 हजार 155 रुपये की रकम बकाया थी। हनुमानगढ़ केंद्रीय सहकारी बैंक की नोहर शाखा द्वारा चावली उर्फ चंद्रावली और सतवीर स्वामी को अगस्त 2013 में 20 लाख रुपये का कृषि ऋण दिया गया था, जिसकी एजव में मां-पुत्र ने पटवार हलका परलीका-ए, चक 1 आरएमएस में 7.514 हैक्टेयर खातेदारी कृषि भूमि का बैंक के पक्ष में रहन रखा गया। बैंक के आवेदन पर कार्यालय, उप पंजीयक, नोहर द्वारा कृषि भूमि का रहननामा 14 अगस्त 2013 को बैंक के पक्ष में दर्ज किया गया, लेकिन पटवारी ने ऋणियों के साथ मिलीभगत कर राजस्व रिकार्ड में कृषि भूमि का इंतकाल दर्ज नहीं किया। इसका लाभ उठाते हुए चावली और सतवीर ने बैंक में गिरवी उपरोक्त कृषि भूमि को खुर्दबुर्द करने की नीयत से, इसकी गिफ्टडीड 16 जून 2016 को रेणूबाला पत्नी परमजीत स्वामी के नाम सम्पादित कर दी।
बैंक प्रबंधन ने बताया कि चूंकि, राजस्व रिकार्ड में उपरोक्त कृषि भूमि पर हनुमानगढ़ केंद्रीय सहकारी बैंंक के नाम इंतकाल दर्ज नहीं था, इसलिए रेणुबाला ने इस कृषि भूमि को किसी अन्य बैंक में गिरवी रखकर, लोन ले लिया। दूसरे बैंक ने इंतकाल अपने नाम दर्ज करवा लिया। केंद्रीय सहकारी बैंक को इस घटनाक्रम की जानकारी मिली और जब मूल ऋणी से सम्पर्क किया गया, तो इन सब ने सुनियोजित ढंग से, दूसरे बैंक से लिये गये ऋण का चुकारा किया और उस बैंक के नाम दर्ज रहन का मुक्ति प्रमाण पत्र प्राप्त कर, अपने ही गांव के किसी व्यक्ति को फरवरी 2023 में उपरोक्त कृषि भूमि कर, उसके नाम इंतकाल दर्ज करवा दिया। बैंक द्वारा ऋण वसूली का प्रयास विफल होने पर, 2 दिसम्बर 2024 को यह प्रकरण खंडीय अतिरिक्त रजिस्ट्रार, बीकानेर को प्रेषित कर, जून 2016 को सम्पादित दानपत्र (गिफ्टडीड) और फरवरी 2023 को दर्ज रजिस्ट्री को शून्य घोषित करवाने के लिए निवेदन किया गया। इस पर खंडीय अतिरिक्त रजिस्ट्रार ने दोनों ऋणियों चावली उर्फ चंद्रावली स्वामी, उसके पुत्र सतवीर स्वामी, दूसरे पुत्र की पत्नी यानी पुत्रवधू रेणुबाला और कृषि भूमि के खरीदार को सहकारी सोसाइटी अधिनियम की धारा 39(ग) के तहत नोटिस जारी किया है। उल्लेखनीय है कि ऐसा ही एक प्रकरण गंगानगर में सामने आया था, जब श्रीगंगानगर के नामी कॉलोनाइजर मुकेश शाह (रिद्धि सिद्धि होम डवल्पर्स प्राइवेट लिमिटेड) ने गंगानगर केंद्रीय सहकारी बैंक के पक्ष में रहन रखी हुई कृषि भूमि को खरीद लिया था। इस केस में भी बैंक के ऋणी चक 6 जैड निवासी, ऋणी सर्वजीतकौर और सहखातेदार, उसके पुत्र जगमन सिंह ने, बैंक का 35 लाख 61 हजार 446 रुपये का कर्ज चुकाये बिना, कृषि भूमि को मुकेश शाह को बेच दिया था। नोटिस जारी होने के बाद, मुकेश शाह ने लोन की रकम अदा नहीं करने पड़े, इसके लिए कई जतन किये, हाईकोर्ट के वकीलों से राय-मशवरा किया, बैंक वालों पर ठीकरा फोडऩे की कोशिश की। परन्तु बैंक का पक्ष मजबूत होने के कारण, खंडीय अतिरिक्त रजिस्ट्रार, बीकानेर ने रिद्धि सिद्धि होम डवल्पर्स प्रा.लि. जरिये मुकेश शाह के नाम रजिस्ट्री को शून्य घोषित कर दिया। इसके बाद, मुकेश शाह ने कर्ज की पूरी रकम बैंक में जमा करवा कर, मुक्ति प्रमाण पत्र लिया। बाद में शाह ने, शून्य घोषित रजिस्ट्री को बहाल करवाने के लिए अतिरिक्त रजिस्ट्रार (अपील्स), जोधपुर के यहां अपील की, जो अभी तक लम्बित है।
क्या कहती है धारा 39(ग)
राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम, 2001 की धारा 39(ग) के प्रावधानों के अनुसार – ‘कोई भी सदस्य खण्ड (क) के अधीन की गई घोषणा में विनिदिष्ट स्थावर सम्पत्ति को पूर्णत: या उसके किसी भाग को तब तक अन्य संक्रांत नहीं करेगा, जब तक सदस्य द्वारा उधार ली गयी सम्पूर्ण रकम का, उस पर के ब्याज सहित संदाय पूर्ण रूप से न कर दिया जाये और इस खण्ड के उल्लंघन में किया गया सम्पत्ति का कोई भी अन्य संक्रामण शून्य होगा।’
