Breaking News

साधुवाली चेक पोस्ट पर रात दिन वाहन चालकों से अवैध वसूली, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो फिर किस काम का!

साधुवाली चेक पोस्ट पर रात दिन वाहन चालकों से अवैध वसूली, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो फिर किस काम का!

सेवानिवृत पुलिस कर्मचारी कल्याण संघ ने अवैध वसूली की रकम पीड़ित को वापस दिलाई

– जिला पुलिस के अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के कटघरे में!

श्रीगंगानगर। श्रीगंगानगर-अबोहर अंतरराज्यीय मार्ग पर जवाहरनगर थाना क्षेत्र अधीन पंजाब सीमा पर पढते गांव साधुवाली में नेशनल हाईवे 62 पर स्थित चेक पोस्ट से गुजरने वाले वाहनों के चालकों से रात दिन बेतहाशा अवैध वसूली सरेआम की जा रही है। जिला पुलिस के आला अधिकारी ही नहीं बल्कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने भी इस अवैध वसूली की तरफ से आंखें मूंद रखी हैं। इस चेक पोस्ट से शायद ही कोई ऐसा वाहन गुजरता होगा, जिसके चालक से वहां तैनात पुलिस कर्मियों द्वारा अवैध वसूली नहीं की जाती हो। अवैध वसूली को यहां एंट्री के नाम से जाना जाता है। बिना एंट्री के वाहन को पंजाब से राजस्थान में नहीं आने दिया जाता। कोई प्रभावशाली अथवा सिफारशी हो तो बात अलग है, अन्यथा किसी के प्रति कोई रियायत नहीं बरती जाती। वाहन के मॉडल के अनुसार ही एंट्री का शुल्क तय है। माल वाहक बड़े ट्रकों से हजारों रुपए की एंट्री ली जाती है। कल बुधवार को ही एक ऐसा मामला सामने आया, जिसमें सेवानिवृत पुलिस कर्मचारी कल्याण संघ को दखल देना पड़ा। अवैध वसूली का मामला आला अधिकारियों के संज्ञान में भी लाया गया लेकिन चेक पोस्ट पर तैनात पुलिस कर्मियों और पोस्ट के प्रभारी अधिकारी के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई। कल्याण संघ के दखल के चलते एक पीड़ित को उस एंट्री के नाम पर वसूल किए गए 2 हजार रुपए वापस देने पड़े। कल्याण संघ के जिलाध्यक्ष रिटायर्ड सीआई कांतासिंह ढिल्लों ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि कल सुबह उन्हें पता चला कि पंजाब की ओर से एक कार में आ रहे दो व्यक्तियों से एंट्री के नाम पर 2 हजार रुपए साधुवाली चेक पोस्ट पर ले लिए गए। इनमें एक व्यक्ति की मां कैंसर से पीड़ित है और वह दिव्यांग भी था। उनको 2000 की कोई रसीद नहीं दी गई। कार सवार व्यक्तियों ने रसीद मांगी तो पुलिस कर्मियों ने कहा कि उनको रसीद बाद में दे दी जाएगी। उक्त व्यक्तियों ने जब अवैध रूप से रुपए लिए जाने की जानकारी कांतासिंह ढिल्लों को दी तो उन्होंने आला अधिकारियों को उनके मोबाइल नंबरों पर मैसेज भेज कर मामले की जानकारी दी। चेक पोस्ट के प्रभारी से बात की और उनको उक्त व्यक्तियों को 2 हजार रुपए की रसीद देने के लिए कहा। प्रभारी ने उन व्यक्तियों को वापस चेक पोस्ट पर जाने के लिए बोला। वहां जाने पर रसीद तो नहीं थी लेकिन उनको 2000 रुपए वापस कर दिए। इसका मतलब बिल्कुल स्पष्ट है कि इस चेक पोस्ट पर पंजाब की ओर से आने वाली गाड़ियों से किस कदर अवैध वसूली की जाती है। अगर वसूली सही होती तो उक्त व्यक्तियों को बाकायदा किसी प्रकार के टैक्स या चालान की रसीद जरूर दी जाती। यह एक उदाहरण मात्र है। यह मामला उजागर होने के बाद साधूवाली गांव से जानकारी जुटा गई तो पता चला कि इस चेक पोस्ट पर पंजाब की ओर से आने वाले किसी भी वाहन को नहीं छोड़ा जाता। कोई प्रभावशाली या सिफारिश हो तो उसकी बात अलग है, लेकिन बाकी किसी के प्रति कोई रियायत नहीं बरती जाती। चेक पोस्ट पर तैनात रहने वाले कर्मचारी न केवल कैश के रूप में एंट्री लेते हैं बल्कि दाएं-बाएं खड़े अपने कुछ जानकारों के मोबाइल नंबरों पर ऑनलाइन रुपए भी ट्रांसफर करवा लेते हैं। इस चेकपोस्ट पर तैनात किए जाने वाले पुलिस कर्मियों में जवाहरनगर थाने के पुलिसकर्मी भी शामिल रहते है। यहां पर होने वाली अवैध वसूली की बंदरबांट सिर्फ इन पुलिस कर्मियों तक सीमित नहीं रहती बल्कि इनके प्रभारी अधिकारियों और उच्च अधिकारियों तक भी बंदरबांट होती है। एक दिन में ही यहां पर अवैध वसूली का आंकड़ा लाखों रूपों तक पहुंच जाता है। ताज्जुब की बात यह है कि यह सब कुछ पुलिस अधीक्षक ऑफिस से महज चार-पांच किलोमीटर की दूरी पर ही हो रहा है। आलाधिकारियों को इसकी खबर नहीं हो यह हो नहीं सकता। इसी प्रकार भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने भी इस तरफ से आंखें मूंद रखी हैं। ब्यूरो की श्रीगंगानगर में दो इकाइयां हैं। जिले में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है लेकिन ब्यूरो तक शिकायत नहीं पहुंचती। लिहाजा ट्रैप की कार्यवाहियां भी नगण्य हैं,लेकिन साधुवाली चेक पोस्ट की तरह संगठित भ्रष्टाचार कई अन्य जगहों पर हो रहा है। ब्यूरो अपनी तरफ से भी कार्यवाही कर सकता है, लेकिन ऐसी कोई मिसाल पिछले लंबे अरसे में ब्यूरो ने पेश की हो याद नहीं आता।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *