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वकालत करनी है तो एआईबीई परीक्षा पास करनी ही होगी

वकालत करनी है तो एआईबीई परीक्षा पास करनी ही होगी
– बार कौंसिल ऑफ़ राजस्थान द्वारा परीक्षा पास नहीं करने वाले श्रीगंगानगर के 528 वकीलों की सूची जारी
श्रीगंगानगर।
विधि स्नातक (ला डिग्री) करने के पश्चात बार संघ में अपना पंजीयन (एनरोलमेंट) करवाने के 2 वर्ष के भीतर अगर अखिल भारतीय बार परीक्षा ( एआईबीई ) उत्तीर्ण नहीं की है तो वह अब वकालत नहीं कर पाएगा। बार कौंसिल ऑफ़ इंडिया के कड़े निर्देशों के तहत बार काउंसिल आफ राजस्थान ने प्रदेश में सभी बार संघों में ऐसे अधिवक्ताओं की सूचियां जारी की हैं, जिन्होंने 1 जुलाई 2010 के बाद ला की डिग्री की है और एनरोलमेंट करवा रखा है, मगर उक्त परीक्षा उन्होंने पास नहीं की हुई। ऐसे अधिवक्ताओं को वकालत करने से तुरंत रोक दिया गया है। इसी क्रम में बार काउंसिल आफ राजस्थान ने श्रीगंगानगर बार संघ में एनरोलमेंट करवाने के बाद यह परीक्षा उत्तीर्ण नहीं करने वाले 528 अधिवक्ताओं की सूची जारी की है। सूची को बार ऑफिस के नोटिस बोर्ड पर चस्पां किया गया है। इस कड़े निर्देश से अधिवक्ताओं में हड़कंप मच गया है। बार ऑफिस से हासिल जानकारी के मुताबिक उक्त 528 अधिवक्ताओं की सूची बार काउंसिल आफ राजस्थान ने जारी की है, जिसे नोटिस बोर्ड पर चस्पां किया गया है। उधर, बार संघ के अध्यक्ष जसवंत भादू एडवोकेट ने बताया कि उक्त सूची में ऐसे अधिवक्ता के नाम भी हैं, जिन्होंने बार में एनरोलमेंट करवाए अभी 2 वर्ष भी नहीं हुए हैं। जिन अधिवक्ताओं को एनरोलमेंट करवाए 2 वर्ष भी नहीं हुए हैं, उनको फिलहाल इतनी ही राहत है कि वह वकालत कर सकते हैं लेकिन 2 वर्ष पूर्ण होने से पहले उनको यह परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी, नहीं तो वे भी वकालत नहीं कर पाएंगे। जानकारी के मुताबिक जिन अधिवक्ताओं को अभी एनरोलमेंट करवा 2 वर्ष भी नहीं हुए हैं, उनकी संख्या 70 से 80 है। 528 अधिवक्ताओं में भी कुछ ऐसे अधिवक्ता भी हैं जिन्होंने उक्त परीक्षा तो उत्तीर्ण कर रखी है, लेकिन परीक्षा परिणाम  का सर्टिफिकेट नहीं दिया है। ऐसे अधिवक्ता अब अपना सर्टिफिकेट ऑफिस में जमा करवा रहे हैं। कुछ अधिवक्ता उन्हें परीक्षा दे रखी है लेकिन अभी परिणाम घोषित नहीं हुआ है।मगर फिर भी उक्त 528 अधिवक्ताओं में आधे से अधिक अधिवक्ता हैं, जिन्होंने उक्त परीक्षा पास नहीं की है। लिहाजा जब तक वे परीक्षा पास नहीं करते, तब तक वकालत नहीं कर सकते।उनको अब परीक्षा पास करनी ही होगी। यह परीक्षा वर्ष में दो बार आयोजित की जाती है। पिछली बार दिसंबर महीने में परीक्षा हुई थी। विधि विशेषज्ञों के मुताबिक अब अगर यह परीक्षा उत्तीर्ण किए बिना कोई अधिवक्ता वकालत करते पाया गया तो उसकी सनद रद्द हो सकती है। बार कौंसिल ऑफ़ इंडिया ने यह परीक्षा पास करना अधिवक्ताओं के लिए एक जुलाई 2010 को अनिवार्य किया था, लेकिन अब इसे सख्ती से लागू किया जा रहा है।

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