13 वर्षीय बालिका को अगवा कर गर्भवती कर देने के आरोपी युवक को 20 वर्ष कठोर कारावास की सजा
श्रीगंगानगर। श्रीगंगानगर में बालकों का लैंगिक अपराधों से संरक्षण अधिनियम (पोक्सो एक्ट) मामलों की विशेष अदालत (संख्या 01) के न्यायाधीश सुरेंद्र खरे ने एक 13 वर्षीय बालिका को बहला फुसलाकर उत्तर प्रदेश ले जाने और जबरदस्ती दुष्कर्म कर गर्भवती कर देने के आरोपी युवक को पोक्सो एक्ट की दो व भारतीय नागरिक संहिता (बीएनएस) की एक धारा में 20-20 वर्ष और बीएनएस की दो धाराओं में पांच-पांच वर्ष साधारण कारावास की सजा सुनाई है। उसे कुल मिलाकर 19 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर दो महीने की अतिरिक्त सजा आरोपी को काटनी होगी। प्रकरण की जानकारी देते हुए विशिष्ट लोक अभियोजक हरवीरसिंह बराड़ ने बताया कि स्थानीय बसंती चौक के समीप एक कॉलोनी में रहने वाली एक बुजुर्ग महिला द्वारा 12 जुलाई 2024 को कोतवाली में दी गई रिपोर्ट के आधार पर सुनील नामक युवक के विरुद्ध उसकी 13 वर्षीय पोती को बहला फुसलाकर भगा ले जाने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। बुजुर्ग महिला ने बताया कि उसका पुत्र एक हाथ से विकलांग है।उसके पुत्र की पत्नी कुछ अरसा पहले उसे छोड़कर चली गई और दूसरी शादी कर ली। उसके पुत्र के दो लड़कियां यानी उसकी दो पोतिया हैं, जिनका पालन पोषण शुरू से ही वह अपने घर में कर रही थी। महिला के मुताबिक वह अपनी पोतियों को साथ लेकर मटीली राठान थाना क्षेत्र में पाकिस्तान सीमा के निकट एक गांव में जमीदार के यहां खेत में मजदूरी करने के लिए जाया करती थी। आरोपी सुनील भी वही पास में ही किसी खेत में काम करता था। वह उसकी 13 वर्षीय बड़ी पोती पर गलत नजर रखने लगा। वह जिस खेत में काम करती थी,सुनील उसके आसपास ही घूमता रहता था। उसने एक दिन अपना मोबाइल फोन नंबर उसकी पोती को दे दिया। फिर वह उसके घर के मोबाइल फोन पर उसकी पोती से बातचीत करने लगा। महिला के अनुसार 11 जुलाई 2024 को वह अपने एक रिश्तेदार का मोगा(पंजाब)में निधन हो जाने के कारण वहां चली गई। उसी दिन शाम चार-पांच बजे के दौरान सुनील बसंती चौक के समीप उसके घर मोटरसाइकिल लेकर आया। उसकी पोती को फोन कर बाहर बुलाया। फिर उसे अपने साथ मोटरसाइकिल पर लेकर कहीं फरार हो गया। पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज कर जांच हवलदार जगराम के सुपुर्द कर दी। पुलिस उक्त नाबालिग लड़की को दस्तयाब करने और आरोपी को पकड़ने में काफी मशक्कत का सामना करना पड़ा। पोती अपने घर का मोबाइल फोन साथ ले गई थी उसका और सुनील दोनों के मोबाइल फोन बंद हो गए। पुलिस ने कॉल डिटेल हासिल की और लोकेशन को ट्रेस किया लेकिन दोनों का कई दिन तक कोई सुराग नहीं लगा। कॉल डिटेल से पता चला कि फरार होने से पहले दोनों में कई दिनों से लगातार आपस में बातचीत हो रही थी। घटना के लगभग 5 महीने बाद नाबालिघ लड़की उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के शिवराजपुर कस्बे में दस्तयाब हुई। तब वह 20 हफ्ते से गर्भवती थी। पुलिस ने उसका मेडिकल चेकअप करवाया और सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान मजिस्ट्रेट से दर्ज करवाए।उसका स्कूल रिकॉर्ड निकलवाया तो उसकी जन्मतिथि 4 मार्च 2011 थी। मेडिकल रिपोर्ट, 164 के बयान और स्कूल सर्टिफिकेट की रिपोर्ट के आधार पर अपहरण के मुकदमे में दुष्कर्म की धाराएं भी जोड़ दी गईं। आगे इस मामले की जांच कोतवाली के सीआई पृथ्वीपालसिंह द्वारा की गई। आरोपी सुनील यादव (23) निवासी गांव देवीपुर सराय तहसील बिल्लौर थाना शिवराजपुर जिला कानपुर,उत्तर प्रदेश को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस द्वारा अनुसंधान मुकम्मल कर उसके विरुद्ध पोक्सो एक्ट, जुवेनाइल एक्ट और अनुसूचित जाति जनजाति अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत चालान पेश किया गया। विशिष्ट लोक अभियोजक हरवीरसिंह बराड़ ने बताया कि अदालत में सुनवाई के दौरान आयोजन पक्ष की ओर से 20 गवाह और 33 दस्तावेज साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। इसके आधार पर विद्वान न्यायाधीश सुरेंद्र खरे ने आज निर्णय देते हुए सुनील यादव को बीएनएस की धारा 137(2)और 96 के तहत 5-5 वर्ष साधारण कारावास और 2000-2000 रुपए जुर्माना, बीएनएस की धारा 65(1) और पोक्सो एक्ट की धारा 5 एल/ 6 व 5(जे) (द्वितीय)/ 6 के तहत 20-20 वर्ष कठोर कारावास की सजा सुनाई तथा 5-50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया। जुर्माना अदा नहीं करने पर उसे 2 महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
