किसान नेताओं को तत्काल रिहा किया जाए
– सम्मेलन के पश्चात किसानों ने मोदी और भगवंत मान के पुतले फूंके
श्रीगंगानगर। श्रीगंगानगर में संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा आज आयोजित किए गए सम्मेलन में उन सभी वरिष्ठ किसान नेताओं की तत्काल रिहाई की मांग की गई,जिन्हें परसों शाम चंडीगढ़ में वार्ता के बहाने बुलाकर गिरफ्तार कर लिया गया। सम्मेलन के पश्चात किसान जुलूस के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंतसिंह मान और नई दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री व आप पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के पुतले जलाकर आक्रोश व्यक्त किया। दी गंगानगर ट्रेडर्स एसोसिएशन के सभागार में आज मोर्चा द्वारा आयोजित सम्मेलन में वरिष्ठ किसान नेता मनिंदरसिंह मान, कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भादू, किसान संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष अमरसिंह बिश्नोई, प्रवक्ता सुभाष सहगल एडवोकेट,भारतीय किसान यूनियन के संदीपसिंह के अलावा गुरलालसिंह मान, जगमीतसिंह,साहबराम, भूरासिंह तथा कुलवंत सिंह आदि किसान नेताओं ने संबोधित किया। सम्मेलन में राजस्थान सरकार से सरसों, चना और जौ की सरकारी खरीद शीघ्र शुरू करने, सरकारी खरीद प्रक्रिया में जन आधार कार्ड की अनिवार्यता को खत्म करने, प्रति किसान 60 क्विंटल सरसों की सरकारी खरीद लिमिट करने, आगामी दिनों में नहर बंदी के दौरान बीकानेर कैनाल की सफाई करवाने, पंजाब क्षेत्र में फिरोजपुर फीडर का नवनिर्माण करवाने और बीकानेर कैनाल में पानी चोरी करने के लिए लगी पाइपों को हटाने जाने की मांग की गई। उपरोक्त 6 मांगों का ज्ञापन सम्मेलन के पश्चात कलेक्ट्रेट पहुंचे किसानों के शिष्टमंडल द्वारा जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम दिया गया। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवानसिंह मान और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री व आप पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल के पुतले जलाए गए। सम्मेलन में किसान नेताओं ने वर्ष 2019 में लाए के तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में शुरू हुए आंदोलन की जायज मांगे केंद्र सरकार द्वारा स्वीकार कर लेने के बाद भी आगे कोई कार्यवाही नहीं करने पर रोष व्यक्त किया गया। किसान वक्ताओं ने कहा कि उक्त मांगों को लागू करवाने के संदर्भ में परसों बुधवार शाम को चंडीगढ़ में केंद्र सरकार से वार्ता करने गए किसान नेताओं जगजीतसिंह डलेवाल, श्रवणसिंह बढेर, अभिमन्यु कुहाड़ आदि को वार्ता खत्म होने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। साथ ही शंभू और खनोरी बॉर्डर पर पक्का मोर्चा लगाए हुए आंदोलनकारी किसानों को जबरदस्ती हटा दिया गया। उन्होंने इसे केंद्र तथा पंजाब सरकार की कायरतापूर्ण कार्यवाही तथा किसानों को कुचलने का दमनचक्र बताया। सम्मेलन में मांग की गई की किसान नेताओं को तत्काल रिहा किया जाए और स्वीकार कर ली गई मांगों को लागू करने के लिए कानून बनाया जाए।
